अतृप्त और असंतुष्ट मन को नियंत्रित करने का एकमात्र साधन तप है।’’-साध्वीवर्या नम्रव्रता श्री जी म.सा.
आष्टा । हमें इस नश्वर देह को इस बार सांसारिक गहनो को छोड़कर चातुर्मासिक अलंकार से सजाना है । जैसे प्रभुपूजन, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान आदि से तन-मन को सुशोभित करना है।…