आष्टा । देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकार की एक अच्छी योजना की राशि सिविल अस्पताल आष्टा में महाघोटाले की भेंट चढ़ गई ।

इस योजना में जो इनसेंटिव की राशि जो लाखो में आई वो किस तरह से महाघोटाले की भेंट चढ़ी जब तह में पहुचे ओर जो जानकारी मिली उसमे बागड़ ही हरे भरे खेत को खा गई है अर्थात स्वास्थ विभाग के अदने से कर्मियों ने बड़े बड़े डॉक्टरों को ही करीब 47 लाख का चूना लगा कर अपना ओर अपने परिवारजनों,रिश्तेदारों के बैंक खातो को नोटो से लबालब भर दिये । अब जब भंडा फूटा तो सीहोर से ले कर भोपाल तक भागम भाग मची हुई है।

सूत्रों से अभी तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार आष्टा सिविल अस्पताल में ये खेल मिली भगत से करीब 6/7 साल से बिना ब्रेक के चल रहा था । बताया गया कि आयुष्मान योजना का जो पोर्टल है उसका पासवर्ड केवल बीएमओ के पास होता है । तो फिर ये पासवर्ड दूसरे कर्मी के पास कैसे पहुचा, पहुचा या दिया गया था ये भी जांच का विषय है । आयुष्मान योजना में जिन मरीजों के पास इस योजना का कार्ड होता है उनका निशुल्क ईलाज होता है,

जो डॉक्टर,नर्स इस योजना के मरीज का ईलाज,ऑपरेशन करते है,जो स्टॉफ सेवा करते है,जो
गोली दवा दी जाती है उसके बदले डॉक्टर,नर्स को इनसेंटिव राशि मिलती है । बताया गया कि सिविल अस्पताल के 6 डॉक्टर्स नर्स,स्वास्थ कर्मी को कई वर्षों से इस योजना से जो इनसेंटिव मिलने वाला वो मिला ही नही ना ही उनके खातों में राशि भेजी गई ।

हाल ही में सिविल अस्पताल में पदस्थ रहे शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ एके जैन ने जब उनेह इस योजना में मिलने वाला इनसेंटिव नही मिला तब उन्होंने एक पत्र बीएमओ सिविल अस्पताल आष्टा को लिखा तब इस मामले में जो घपला हुआ उसका भांडा फूटा
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में सिविल अस्पताल के वे जिम्मेदार जिनके जिम्मे आई राशि जिसके नाम काम के बदले आई थी उनके खातों में भेजना था लेकिन उन जिम्मेदारों ने उक्त योजना में जो इनसेंटिव की राशि आई वो

जिनके खातों में भेजी जाना थी उसमे ना भेजते हुए पत्नि,अपने सगे संबंधियों के खातों में ट्रांसफर कर दी । इस महाघोटाले में केवल एक ही व्यक्ति शामिल हो सम्भव ही नही है । प्रश्न अब यह है कि इस महाघोटाले में आष्टा से सीहोर,भोपाल तक कौन कौन शामिल है ।

अब जब ये महाघोटाला उजागर हो ही गया है तो सरकार को इसकी पूरी जांच प्रदेश से स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर कराना चाहिये । सिविल अस्पताल में ये तो एक योजना में महाघोटाला सामने आया है,सरकार की ऐसी कई योजनाएं स्वास्थ विभाग में चल रही है जरा एक बार उन सब की भी गहराई से जांच हो जाये ताकि सब कुछ साफ साफ हो जाये की कहा दूध का दूध है और कहा कहा दूध पानी हो गया है.?

जैसे ही इस योजना में महाघोटाले की खबरे सोशल मीडिया में भी आई तब सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है की आयुष्मान योजना में महाघोटाला आष्टा में ही नही जावर में भी हुआ है.? जिम्मेदारों को जावर के लोगो के आरोपो को भी संज्ञान में लेना चाहिये और जांच में आष्टा के साथ साथ जावर को भी जोड़ना चाहिये । कल जैसे ही यह मामला उजागर हुआ । आज सिविल अस्पताल आष्टा के बीएमओ डॉ अमित माथुर ने इस पूरे मामले से जिसमे करीब 47 लाख का घोटाला हुआ है,से सीएमएचओ को अवगत करा दिया है ।

इनका कहना है….
आयुष्मान योजना में आई इनसेंटिव की राशि मे गड़बड़ी की आज सिविल अस्पताल आष्टा के बीएमओ डॉ अमित माथुर ने मुझे दी है,में इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को लिख रहा हु,जांच दल भी वही से गठित होगा
डॉ सुधीर डेहरिया,सीएमएचओ सीहोर
























