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हिन्दी-उर्दू साहित्य जगत के प्रख्यात साहित्यकार, वक्ता और विचारक श्री अजहर हाशमी साहब का निधन हो गया। उनके निधन से साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे, जिनकी लेखनी सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण थी।

अजहर हाशमी साहब का साहित्यिक जीवन अनेक दशकों में फैला हुआ था। वे न केवल एक ओजस्वी कवि थे, बल्कि एक गम्भीर आलोचक, लेखक और प्रेरणादायक वक्ता के रूप में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनका लेखन जीवन, दर्शन और समाज के विविध पहलुओं को गहराई से छूता था। नगर में गुड़ी पड़वा , शिक्षक दिवस और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वे एक धर्म मर्मज्ञ , प्रेरक उद्बोधक ,चिंतक और साहित्यकार के रूप में कैलाश परमार मित्रमंडल तथा प्रभु प्रेमी संघ के द्वारा आयोजित साहित्यिक व सांस्कृतिक आयोजनों में वे मंच को सुशोभित करते रहे। उनकी वाणी में गहराई, सौम्यता और विचारों की स्पष्टता होती थी, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनका व्यक्तित्व संयमित, विनम्र और प्रेरणादायक था।

वे अपने पीछे साहित्य की एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उनके निधन पर नगर के साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, राजनीतिज्ञ और सुधी जन कैलाश परमार , रामश्रीवादी , अजित जैन आस्था, अतुल सुराणा , संजय जैन किला , जुगल पंवार आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अनेक संस्थाओं और संगठनों ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।

“हमेशा सकारात्मक सोच रखो नकारात्मक सोच नहीं,जैन धर्म अनादिकाल को लेकर चलता है, पुरुषार्थ कर आत्म कल्याण करें — आर्यिका विदिता श्रीजी”

व्यवहार और णमोकार महामंत्र को समझें। बहुत पुण्य था मनुष्य पर्याय मिली। तीनों लोकों में जन्म और मरण असंख्यात बार किया। वीतरागी सभी को जानते हैं ,वह सर्वझ है, हितोपदेशी है।चारों घातियों का नाश करने वाले अरिहंत परमेष्ठि है।जैन धर्म अनादिकाल को लेकर चलता है।आठ कर्म ज्ञाना वर्णीय, दर्शना वर्णीय,वेदनीय वर्णीय, मोहनिया वर्णीय,नाम वर्णीय, गौत्र वर्णीय,अंत्राय वर्णीय आदि।
तीर्थंकरों ने पुरुषार्थ किया तो भगवान बने,वे भी आप जैसे पुरुष अर्थात मानव थे।पुरुषार्थ करने पर हमारे में छुपे हुए गुण प्रकट होते हैं। हमने पुरुषार्थ किया तो हम माताजी बन गई,आप भी पुरुषार्थ कर मुनिराज बनों।जानने की इच्छा को ज्ञान कहते हैं।जो जानता है, देखते हैं वह जीव है। ज्ञान और दर्शन हर व्यक्ति में है और इसे जिसने जान लिया वह चारित्र, आचरण में आते हैं। आपने बहुत शास्त्रों को पढ़ा लेकिन आपको उसे प्रकट करने का तरीका नहीं आता है, अभिव्यक्ति नहीं है।हमेशा सकारात्मक सोच रखें नकारात्मक नहीं। सकारात्मक सोच से सब अच्छा ही होगा।

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उक्त बातें श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या आर्यिका रत्न 105 श्री विदिता श्री माता जी ने आशीष वचन देते हुए कहीं। आपने कहां कि अरिहंत भगवान की प्रतिमा पर चिन्ह रहता है। श्रीवस्त्र का चिन्ह होता है ,सीने पर चार पंखुड़ियां रहती है। हमने अनेकांत धर्म में जन्म लिया है। व्यवहारिकता में जन्म लिया है।शुभ उपयोग में स्थिर होना अपने हाथों में है।सिद्धोपयोग अपने हाथों में नहीं है।आर्यिका विदिता श्रीजी ने कहा कि हम शुभ उपयोग में जी रहे हैं, तभी शुभ उपयोग होगा। मंदिर में आने पर शत प्रतिशत शुभ उपयोग होगा,अशुभ उपयोग में नहीं।आप अपने भाव हमेशा अच्छे रखें।शंकलेष रखकर भी आप शुभ उपयोग कर रहे हैं। प्रतिमा योग दृढ़ मजबूत नहीं होगा तब तक आपका कल्याण नहीं। कर्मों को संभालने के लिए प्रतिमा योग मजबूत होना चाहिए।सीता ने राम के कहने पर अग्नि परीक्षा अपने दृढ़ संकल्प के साथ दी। महापुरुषों का चारित्र पढ़ें। प्रतिमा योग मजबूत नहीं होगा तो हम दूसरे को ही दोष देंगे। सीता ने श्री राम से कहा व्यक्ति के कहने पर हमें छोड़ रहे हो, लेकिन किसी के कहने पर धर्म मत छोड़ना ।साधुओं पर उपसर्ग आएं तो समाधि ले लेना चाहिए। आपने बताया कि हमारे गुरुदेव आचार्य विराग सागर मुनिराज का अपहरण कर लिया,उन्होंने अपने गुरु का ध्यान करते हुए तपस्या प्रारंभ कर दी, उन्हें अपहरण करने वालो ने जंगल में छोड़ दिया। सूचना मिलने पर समाज वाले, पुलिस वहां पहुंची जैसे- तैसे आपको गांव में लाया गया।

लेकिन वह कुछ भी नहीं बोल रहे थे , आपके क्षुल्लक दीक्षा देने वाले गुरु तपस्वी सम्राट सन्मति सागर जी ने आचार्य श्री को ध्यान से उठने को कहा और उन्होंने ध्यान छोड़ा,छत्तीस घंटे ध्यान -साधना में रहें।आपके क्षुल्लक गुरु छाछ – पानी से छः महीने तक आहार चर्या करी। आचार्य विराग सागर मुनिराज ने 44 साल की साधना में साढ़े पांच सौ को दीक्षा दी। नियम बहुत ही सोच समझकर लेवें,उनका पालन करें, विशेष परिस्थितियों की छूट, लेकिन आगम के विरुद्ध छूट नहीं रखें। अपने नियम, संयम का पालन करें। जैन धर्म बहुत ही पवित्र और पावन है,इसे समझने का प्रयास करें। सुबह साढ़े आठ बजे प्रवचन आर्यिका विदिता श्रीजी माता जी के आशीष वचन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर सुबह साढ़े आठ बजे होंगे।

“आज भी जारी रही अतिक्रमण हटाओ मुहिम,4300 रुपये ठोका जुर्माना”

नगर को अतिक्रमण से मुक्त कराने शुरू हुई प्रशासन,नपा,पुलिस की संयुक्त मुहिम आज भी जारी रही ।

सीएमओ राजेश सक्सेना ने बताया की आज होटल प्रतीक्षा से जनपद चोराहे तक मार्ग के अतिक्रमण हटाये एवं अतिक्रमणकर्ताओं पर 4300/ रुपये का जुर्माना भी ठोका । कल चौपाटी पर हटाया था अतिक्रमण

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