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आष्टा। नगर के नवीन मंडी प्रांगण में आयोजित मालवा माटी के सुप्रसिद्ध संत एवं कथावाचक पं. कमलकिशोर नागर महाराज की श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा पांडाल में प्रातःकाल से ही महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों की भारी भीड़ देखने को मिली।

पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। मानो श्रद्धालु यह संदेश दे रहे हों कि भक्ति के आगे तपती गर्मी भी छोटी है।


कथा के दौरान पूज्य गुरुदेव पं. कमलकिशोर नागर महाराज ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों में परिवार, संस्कार, सेवा और राष्ट्रभक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि —
“यदि घर-परिवार में सामंजस्य है, सब एक-दूसरे की सुनते हैं, प्रेम और सम्मान बना रहता है, तो वही घर बैकुंठ बन जाता है।”


उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वर्षा ऋतु की पहली बारिश वातावरण की सारी गंदगी साफ कर देती है, उसी प्रकार प्रभु कृपा की वर्षा मनुष्य के जीवन के दुख, पाप और विकारों को समाप्त कर देती है।


गुरुदेव ने समाज में बढ़ते धर्मांतरण को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को बहकाकर धर्मांतरण कराया जा रहा है, जिस पर रोक लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन धर्म की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।


अपने सहज और प्रेरणादायी प्रवचनों में गुरुदेव ने दिखावे एवं अनावश्यक खर्चों से बचने का संदेश देते हुए कहा कि आज के समय में लोगों के लिए दाल-रोटी चलाना कठिन हो रहा है, ऐसे में फैशन और बाहरी दिखावे पर अनावश्यक खर्च करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य की सुंदरता उसके संस्कार, व्यवहार और सेवा भावना में होती है।


गुरुदेव ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं बल्कि पुण्य और पवित्र भूमि है। देश से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। उन्होंने लोगों से राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सद्भाव और सेवा भावना को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में तीन चीजें मिल जाएं तो समझो भगवान मिल गए — माता-पिता की सेवा का अवसर, गरीब और दुखियों की सेवा का भाव तथा सत्संग का संग।
अपने प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि धर्म में सुधार होना चाहिए,

शास्त्रों में सुधार होना चाहिए और संतों में सुधार होना चाहिए, लेकिन सबसे पहले व्यक्ति को स्वयं को, अपने बच्चों को और अपने परिवार को सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
गुरुदेव ने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

यदि बुजुर्गों का आशीर्वाद नहीं मिला तो जीवन अधूरा रह जाता है।
भीषण गर्मी के बीच कथा समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। कथा पांडाल में ठंडे पानी के फव्वारे, शीतल पेयजल, ठंडी हवा एवं सुचारु बैठक व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को गर्मी से काफी राहत मिली।

इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था नजर नहीं आई। आवागमन, पार्किंग एवं अन्य व्यवस्थाएं भी सुचारु रूप से संचालित होती रहीं। समिति की व्यवस्थाओं की उपस्थित जनसमूह ने मुक्त कंठ से सराहना की।


तृतीय दिवस की कथा में महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल पर दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद में डूबे नजर आए।
कार्यक्रम के अंत में महाआरती एवं प्रसादी वितरण किया गया। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की।

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