आष्टा। मालवा के सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित कमलकिशोर नागर महाराज के श्रीमुख से होने वाली श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ रविवार 24 मई से भोपाल-इंदौर बायपास स्थित नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। कथा प्रारंभ होने से पूर्व निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय रंग में रंग दिया। यात्रा में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं एवं बच्चों की भारी सहभागिता देखने को मिली। पहले ही दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया।

सुबह मां कृष्णा आश्रम से प्रारंभ हुई कलश यात्रा में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण किए चल रही थीं, वहीं पुरुष वर्ग ढोल-बैंड और भजन-कीर्तन के साथ नाचते-गाते “गुरुदेव की जय” एवं “राधे-राधे” के जयघोष लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी दिखाई नहीं दी। नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरती हुई यात्रा कथा स्थल पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजा-अर्चना के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा स्थल को आकर्षक धार्मिक सजावट से सजाया गया है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल, पार्किंग एवं अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रूप दिया गया है। कथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से हरि इच्छा तक चलेगी और 30 मई 2026 तक जारी रहेगी।

कथा के दौरान पंडित कमलकिशोर नागर महाराज अपने मधुर वचनों एवं सरल शैली में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म, भक्ति और जीवन के गूढ़ रहस्यों का वर्णन कर रहे हैं। कथा के प्रथम दिवस महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जितना आडंबरों, दिखावे और अहंकार से दूर रहेगा, उतनी ही शीघ्रता से परमात्मा की प्राप्ति कर सकेगा। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी चमक-दमक में उलझकर अपने भीतर की शांति खोता जा रहा है। जीवन का वास्तविक आनंद सरलता, विनम्रता और सच्ची भक्ति में है। महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि धर्म में दिखावा नहीं, बल्कि भावनाओं की पवित्रता महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि “यह स्वागत उसका स्वागत, इसको माला पहनाना, उसको माला पहनाना… यह सब भी एक प्रकार का आडंबर बनता जा रहा है। किसी को अच्छा लगता है तो किसी को बुरा लगता है। धर्म में भेदभाव और प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार जिस विषय का डॉक्टर होता है, उसी से उसका उपचार करवाया जाता है, उसी प्रकार धर्म और अध्यात्म का मार्ग भी योग्य संतों और सत्संग के माध्यम से ही समझा जा सकता है। आज समाज में लोग बाहरी दिखावे को अधिक महत्व दे रहे हैं, जबकि आत्मशुद्धि और आचरण की पवित्रता सबसे आवश्यक है।

महाराज श्री ने कहा कि “आज के समय में सफेद कपड़ों पर दाग लग जाए तो लोग उसे सामान्य मान लेते हैं, लेकिन भगवा वस्त्रों पर दाग नहीं लगना चाहिए। भगवा त्याग, तपस्या और पवित्रता का प्रतीक है। जो व्यक्ति भगवा धारण करता है, उसका आचरण भी वैसा ही निर्मल होना चाहिए।” साधारण मनुष्य मोह-माया और अनेक प्रपंचों में फंसकर गंगा स्नान करके अपने पापों से मुक्ति पा सकता है, लेकिन जो व्यक्ति भगवा धारण करके भी अधर्म और पाप करता है, उसके पाप कहीं नहीं धुलते। इसलिए संत और धर्म से जुड़े लोगों को अपने आचरण में विशेष सावधानी और शुचिता रखनी चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि कलयुग में सत्संग ही सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है, जो मनुष्य को सहज रूप से परमात्मा की ओर खींच ले जाता है। सत्संग से मन को शांति मिलती है, जीवन में सकारात्मकता आती है और मनुष्य के भीतर संस्कार एवं सद्भाव जागृत होते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में सादगी अपनाएं, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करें तथा जरूरतमंदों की सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानें। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए बड़े-बड़े आडंबर, महंगे आयोजन या दिखावटी भक्ति की आवश्यकता नहीं होती। भगवान तो केवल निर्मल मन, सच्ची श्रद्धा और निष्कपट प्रेम से प्रसन्न हो जाते हैं। कथा आयोजन को लेकर नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी उत्साह का वातावरण बना हुआ है। आयोजन समिति एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालु घर-घर पहुंचकर कथा के निमंत्रण पत्र वितरित कर रहे हैं। गांव-गांव एवं मोहल्लों में कथा के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर, पोस्टर एवं धार्मिक झांकियों के माध्यम से लोगों को कथा में शामिल होने का आमंत्रण दिया जा रहा है।

आज की कथा में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। गुरुभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कथा स्थल पर श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए तथा पूरे परिसर में जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयघोष गूंजते रहे।
पंडित कमलकिशोर नागर गोभक्त सेवा समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। समिति के अनुसार जहां भी पंडित कमलकिशोर नागर महाराज की कथा होती है, वहां भक्ति, संस्कार, सकारात्मक ऊर्जा एवं सामाजिक सद्भाव का वातावरण निर्मित हो जाता है। कथा आयोजन से क्षेत्र में धार्मिक चेतना, भाईचारे और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था को नई मजबूती मिल रही है।
























