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आष्टा । जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने आज आष्टा जनपद पंचायत के सभाकक्ष में बैठक आयोजित कर आष्टा जनपद में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान, आवास योजना, समग्र ईकेवाईसी, नल जल योजना, वृक्षारोपण, मनरेगा, एसबीएम, एनआरएलएम एवं आयुष्मान कार्ड सहित सभी विभागीय योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की और संबंधितों को कार्यों में प्रगति लाने के निर्देश दिए।

कार्यो में प्रगति के हाल बे हाल देख जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने
समग्र ईकेवाईसी, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियों में प्रगति कम पाए जाने पर आष्टा जनपद के 05 उपयंत्रियों को (जनपद के इतिहास में पहली बार एक साथ इतने उपयंत्रियों को)
एवं 09 ग्राम पंचायतों के पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। इसके साथ ही निर्देश दिए कि जल्द प्रगति नही लाने पर उनके विरूद्ध निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने निर्देश दिए कि समग्र ईकेवाईसी का कार्य जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए। उन्होंने समग्र ईकेवाईसी के कार्य की वार्डवार एवं ग्रामवार समीक्षा की। उन्होंने प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि जो आवास स्वीकृत हो गए है उन्हें जल्‍द से जल्द पूर्ण कराया जाए। उनहोंने समग्र ईकेवाईसी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में प्रगति कम पाए जाने पर ग्राम हकीमपुर, अरोलिया जावर, सैधोंखेडी, शंभूखेडी, गुराड़िया, वाजाप्त, पीपल्या सालारसी,बमूलिया खींची के पंचायत सचिवों को कारण नोटिस जारी किए।


जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान उन्होंने अभियान के तहत लक्ष्य अनुसार खेत तालाब, डगवेल रिचार्ज, पोखर निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्यों एवं गतिविधियों की प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेत तालाब एवं कूप रिचार्ज के कार्यों को वर्षा ऋतु से पहले ही पूर्ण करा लिया जाए ताकि वर्षा जल का संग्रहण एवं संरक्षण हो सके।

इसके साथ ही उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियों में कम प्रगति के लिए उपयंत्री अनिल गुप्ता, दीक्षा नागर, मयूर राठौर, अनिल खरे एवं संजीव गोस्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किए। बैठक में जनपद सीईओ सीएमओ, सहायक यंत्री, योजनाओं के शाखा प्रभारी, पंचायतों के सचिव,जीआरएस, एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

आखिर उपयंत्री फिर करते क्या है,बड़ा प्रश्न.? क्या कम प्रगति के दोषी ये उपयंत्री-सचिव ही है.? जनपद सीईओ की कोई जिम्मेदारी नही बनती है क्या.?

अभी तक तो जनपद पंचायत में विकास कार्यो के प्रति,अधिकारियों,कर्मचारियों, सचिवों,रोजगार सहायकों की लापरवाही,अनदेखी,खबरो में पढ़ी जाती रही थी । आज कार्य के प्रति सख्त अधिकारी की छबि की धनी जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने स्वयं समीक्षा के दौरान देखा है कि आष्टा जनपद में क्या हाल है.?
जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने आज आष्टा जनपद पंचायत के सभाकक्ष में बैठक आयोजित कर आष्टा जनपद में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।

इसके साथ ही उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियों में कम प्रगति के लिए उपयंत्री अनिल गुप्ता, दीक्षा नागर, मयूर राठौर, अनिल खरे एवं संजीव गोस्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किए। क्या कम प्रगति के दोषी केवल ये उपयंत्री ही है । क्या इसको लेकर जनपद के सीईओ को क्लीनचिट दी जा सकती है.? जितनी जिम्मेदारी कम प्रगति की सचिवों,उपयंत्रियों की है.? क्या इसके जिम्मेदार सीईओ नही है.?

अगर वे भी बराबर के जिम्मेदार है तो कारण बताओ नोटिश जनपद सीईओ को भी जारी होना चाहिये.? कारण यह की जो कमी आज पाई,देखी गई वो इस बैठक के पूर्व जनपद सीईओ क्यो नही देख पाये ।
अब देखना होगा की आज जो कमियां जिला पंचायत सीईओ ने समीक्षा बैठक में पाई वो कब तक लक्ष्य को प्राप्त करते है ।

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