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आष्टा। नगर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पंडाल में पहुंचे। पूरा वातावरण “आलकी की पालकी जय हो कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा। चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा,भक्ति उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया गया।


कान्हा के जन्म दिवस के अवसर पर पंडाल को फूल,हरियाली एवं गुब्बारों से आकर्षक सजावट से मनमोहक रूप से सजाया गया । विशेष रूप से महिला शक्ति द्वारा भव्य तैयारियां की गईं। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पुष्प वर्षा और उल्लास के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया,सभी ने कान्हा जी के दर्शन किये । आज कथा का मुख्य विषय मां के प्रेम और महिमा पर केंद्रित रहा।

गुरुदेव ने कहा कि यदि संसार में मां न होती तो न रघुनाथ होते और न ही कान्हा। पृथ्वी पर जितने भी जीव हैं, सबकी जननी मां है। मां की महिमा, उसका प्रेम और उपकार अनंत है। जिनके पास माता-पिता का प्रेम होता है, वे वास्तव में सबसे बड़े धनवान होते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी संतान को परोपकार, करुणा और दुखियों के आंसू पोंछने के संस्कार दें। गुरुदेव ने बताया कि पांच प्रकार की मिट्टी को बैकुंठ से भी अधिक पवित्र माना गया है—

जननी माता के चरणों की मिट्टी, गौ माता के चरणों की मिट्टी, मकान से श्मशान जाने वाले मार्ग की मिट्टी, मकान से मंदिर जाने वाले मार्ग की मिट्टी। इस मिट्टी को घर के मंदिर के एक कोने में रखना चाहिए।
उन्होंने जीवन को यात्रा रूपी बताते हुए कहा कि हम सभी इस संसार में मुसाफिर हैं। जीवन रूपी ट्रेन में हर किसी की अपने-अपने स्टेशन है, जहां उतरना निश्चित है। इसलिए प्रेम, सद्भाव और अच्छे व्यवहार के साथ जीवन जीना चाहिए, क्योंकि किसी को नहीं पता कि उसकी अंतिम स्टेशन कब आ जाए।


गुरुदेव ने कहा कि धन की जागीर से बड़ा धन माता-पिता द्वारा दी गई दया, ईमानदारी, चरित्र, धर्म और परोपकार की संपत्ति होती है। चरित्रवान व्यक्ति सदैव इत्र की तरह समाज में सुगंध फैलाता है। बच्चों को ऐसी शिक्षा दें कि वे देश, धर्म और मानवता के लिए समर्पित बनें। उन्होंने शहीद भगत सिंह का उदाहरण देते हुए मातृभूमि के प्रति बलिदान की भावना पर प्रकाश डाला।
साथ ही गुरुदेव ने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार बच्चों के नाम भगवान के नाम पर रखने चाहिए, ताकि नाम लेते ही ईश्वर का स्मरण हो।


इस अवसर पर पूर्व विधायक रघुनाथसिंह मालवीय, नगर परिषद अध्यक्ष हेमकुंवर राय सिंह मेवाड़ा,समिति अध्यक्ष रूपेश राठौर, संयोजक डॉ. मनोज नागर,
पार्षद तेज सिंह राठौड़,जिला पंचायत उपाध्यक्ष जीवन सिंह मंडलोई, जिला पंचायत सदस्य महेंद्र सिंह इंजीनियर,पार्षद तारा कटारिया
सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

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