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आष्टा। श्री दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण महापर्व की समाप्ति पर एकम की श्रीजी की भव्य रथयात्रा सोमवार की दोपहर को मुनिश्री सजग सागर जी, प्रवर सागर जी एवं सानंद सागर मुनिराज के पावन सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर से गाजे-बाजे एवं समाज के बच्चों के दिव्य घोष के साथ निकाली गई।

स्वर्ण रथ पर भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा विराजमान कर शोले के वस्त्र धारण कर श्रद्धालुओं द्वारा अपने हाथों से खींच कर तथा रजत पालकी में मां जिनवाणी विराजमान कर श्रद्धालु अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे। श्रीजी की रथयात्रा किला मंदिर से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मानस भवन परिसर में पहुंची।

वहां श्रीजी के अभिषेक कर स्वर्ण एवं रजत कलशों को लाभार्थी परिवार की महिलाएं अपने मस्तिष्क पर रखकर मानस भवन में पहुंची। वहां पर भगवान के अभिषेक शांति धारा कर रथयात्रा सुभाष चौक, गंज, बुधवारा,गल चौराहा से सिकंदर बाजार, बड़ा बाजार होते हुए किला मंदिर पर पहुंचे।
एक रथ पर आचार्य भगवंत के चित्र एवं दूसरे रथ पर लाभार्थी चल रहे थे।

मुस्लिम समाज सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने स्वर्ण रथ में सिंहासन पर विराजमान भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा और मां जिनवाणी के साथ ही पूज्य मुनि सजग सागर जी, सानंद सागर जी एवं मुनि प्रवर सागर जी की आरती कर मुनि महाराज के पाद प्रक्षालन किये।

जलयात्रा में शामिल दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठिजन तथा पंचायत कमेटी के पदाधिकारियों सहित श्रावक -श्राविकाओं का स्वागत किया।मुनिश्री सानंद सागर मुनिराज ने कहां दस दिनों में ऐसे संस्कार डल गए जो अपनी आत्मा का कल्याण कर लेवें। धर्म प्रभावना करने से पुण्याणुवंदी पुण्य का संचय होगा।

एक मां ने दूसरी मां के बेटे को अपने ही बेटे के हत्यारे को क्षमा कर दिया।उस मां में ममत्व आ गया। क्रोध में व्यक्ति अंधा हो जाता है। क्रोध दुःख देने वाला है। क्रोध में एक -दूसरे की जान ले लेते हैं।

मुनिश्री सजग सागर जी ने कहा कि दसलक्षण पर्व क्षमा से ही शुरू होता है और क्षमा पर ही समाप्त होते है। तप तो खूब कर रहे आप पर जब तक जीवन मे अहिंसा नही आएगी तब तक पर्व मनाने की सार्थकता नही मानी जाती है ।

एक -दूसरे से गलती होने पर माफी मांग लेना एक दूसरे को गले लगा लेना यही सबसे बड़ा आभूषण वीरों का आभूषण माना गया है।कोई कितनी ही गाली दे हमे कर्म सिद्धांत को समझ कर उल्टा पलटवार नही करना अहिंसा परमो धर्म माना गया है ।

जिनसे हमारा बेर है उनसे विशेष रूप से हमे क्षमा मांगना चाहिए।मुनिश्री प्रवर सागर जी महाराज ने कहा कि इस संसार पर दृष्टि पड़ती है तो देखने मे आता है कि लाखों -करोड़ों जीवों में विरले जीव जो कि मनुष्य पर्याय के जीव होते है ,जो जिनवाणी का श्रवण करके अपने जीवन में धारण कर पाते है ।जो भगवान के समवशरण में बैठते है वे ही पुण्यवान जीव हुआ करते है ।आज क्षमावाणी का दिन है , मंदिर में आये हो तो कुछ धारण कर के ही जाना, बिना धारण किये नहीं जाये। जिनकी मात्र धन पर दृष्टि होती है ,वे पुण्य का संचय नही कर पाते है।

पुण्य का संचय करना बहुत बड़ी उपलब्धि होती है।पर्व के दिनों में विशेष पुण्य का उदय होता है मात्र नारा लगाना ही धर्म नही है,नारे को जीवन मे उतारना धर्म है। जैन समाज एवं मुस्लिम समाज के जुलूस की व्यवस्था को देखने अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत आष्टा पहुंची और सिकंदर बाजार स्थित पुलिस चौकी पर एसडीएम नितिन कुमार टाले के साथ नजर रखे हुए थी।

वहीं एसडीओपी आकाश अमलकर ,नगर निरीक्षक गिरीश दुबे ,जावर थाना प्रभारी नीता देअरवाल ,पार्वती थाना प्रभारी हरिसिंह परमार आदि दोनों समाज के जुलूस को व्यवस्थित रूप से निकलवाने के लिए अपनी टीम के साथ जुटे रहे।वही जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा।

“नपा अध्यक्ष हेमकुंवर मेवाड़ा की उपस्थिति में हुआ दिगंबर जैन समाज के जुलूस का स्वागत”

श्री दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण महापर्व पर्यूषण के समापन अवसर पर समाजजनों द्वारा एकम का जलयात्रा जुलूस निकाला। उक्त जुलूस किला स्थित दिगंबर मंदिर में विराजित मुनिश्री के सानिध्य में किला मंदिर से प्रारंभ हुआ जो नगर के प्रमुख मार्गो से होता हुआ पुनः किला मंदिर पहुंचा।

दिगंबर जैन समाज द्वारा निकाले गए एकम के जुलूस का गल चौराहा पर नगरपालिका द्वारा मंच बनाकर नपाध्यक्ष हेमकुंवर रायसिंह मेवाड़ा की उपस्थिति में दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष आनंद पोरवाल, वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र गंगवाल, गोपी सेठी, धनरूपमल जैन, मुकेश बड़जात्या, कैलाश जैन चित्रलोक, कोमल जैन,

यतेन्द्र श्रीमोड़, दीपक जैन कंचन, शरद जैन, पवन जैन सहित अन्य समाज के वरिष्ठजनों का मोती की माला व दुपट्टा डालकर स्वागत सम्मान किया। जुलूस में श्राविकाएं व श्रावकगण विभिन्न संगठनों की गणवेश में चल रहे थे, वहीं स्वर्णवेदी में भगवान विराजित थे, जिनका नपाध्यक्ष श्रीमती हेमकुंवर मेवाड़ा द्वारा पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया तथा जुलूस में शामिल मुनिश्री का भी नपाध्यक्ष श्रीमती मेवाड़ा द्वारा चरण वंदन कर आशीर्वाद लिया।


इस अवसर पर भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष श्रीमती अंजनी विशाल चौरसिया, पार्षद कमलेश जैन, रवि शर्मा, सुभाष नामदेव, डॉ. सलीम खान, तेजसिंह राठौर, अतीक कुरैशी, संजीव सोनी पांचम, रूपेश राठौर, मोहित सोनी, श्रीमती गिरजा कुशवाह, श्रीमती रूपाली चौरसिया, सुमित मेहता, गबू सोनी, जिम्मी राठौर, अनिमेश सोनी, विजय मेवाड़ा सहित अन्य लोग मौजूद थे।

“जैन समाज जुलूस का प्रभु प्रेमी संघ ने स्वागत किया”

जैन समाज के निकले जुलूस का आज प्रभु प्रेमी संघ ने स्वागत किया। पर्युषण पर्व की समाप्ति पर दिगम्बर जैन समाज द्वारा देव शास्त्र गुरु से सुशोभित विशाल जलयात्रा निकाली गई । पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने प्रगति मार्ग पर चल समारोह में स्वर्ण वेदिका में

विराजमान जिनेन्द्र भगवान और मां जिनवाणी के साथ ही पूज्य मुनि सजग सागर जी , सानन्द सागर जी एवम मुनि प्रवर सागर जी की आरती कर मुनि महाराज के पाद प्रक्षालन किये। प्रभु प्रेमी संघ ने जलयात्रा में शामिल दिगम्बर जैन समाज के श्रेष्ठिजन तथा पंचायत कमेटी के पदाधिकारियों सहित सभी श्रावक श्राविकाओं का स्वागत किया ।

प्रभु प्रेमी संघ ने शोभायात्रा में शामिल भक्तजन के लिये शीतल पेयजल की व्यवस्था भी की
इस अवसर पर जैन समाज के आनंद पोरवाल, यतेंद्र जैन, अजीत कुमार जैन, अनिल जैन , सुनील जैन प्रगति, प्रदीप प्रगति , पल्लव प्रगति , डॉ राजेंद्र जैन, पदम जैन आदि उपस्थित थे । प्रभु प्रेमी संघ के संयोजक पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार जैन समाज के क्षमा वाणी कार्य को सभी धर्मों से अनूठा कार्य बताया

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