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आचार्य विद्या सागर प्रामाणिक पाठशाला द्वारा श्री दिगम्बर जैन किला मंदिर में पर्युषण महापर्व के द्वितीय दिवस पर बच्चो के सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए । कार्यक्रम का आरंभ कु. इशिका , कृतिका, कनिष्का , अवनी जैन ने भावभरे मंगलाचरण से किया

सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्री अकलंक निकलंक की बलिदान गाथा एवम सुकमाल मुनि की नाटिका रही जिसने भरपूर सराहना बटोरी , परम पूज्य आचार्य प्रवर श्री विद्या सागर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित किये गए एवम बच्चो को पारितोषिक ओर प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया ।

अंत मे उपस्थित जन का आभार श्रीमति रुचि जैन ने किया ।
परीक्षा में उत्तीर्ण हुए सभी बालक बालिकाओ को पाठशाला प्रभारी अजय जैन किला सहित विजय जैन, संदीप जैन ,महेन्द जैन जादूगर नरेन्द्र गंगवाल ने बधाई दी

“व्यक्ति के अंदर सरलता हो तभी उत्तम आर्जव धर्म प्रकट हो सकता है- मुनि प्रवर सागर जी
गंज मंदिर समिति ने जलयात्रा में शामिल होने हेतु मुनिश्री को श्रीफल भेंट किया”

कुल तपस्या करने के लिए मिला है।जो त्याग- तपस्या करेंगे वह स्वर्ग में जाते है। मर्यादा का पालन करते हैं तो आर्य है, व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है।अभक्ष पदार्थ, फास्ट फूड का सेवन करने वाले आर्य नहीं। जब तक धर्म समझ में नहीं आएगा, तब तक आप धर्मात्मा नहीं बन सकते।

भगवान की भक्ति बिना अपेक्षा से करना चाहिए।जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से कर्म रूपी शत्रु को परास्त कर दिया है, जिन्होंने अपने आत्म साम्राज्य को सुरक्षित कर लिया है,वह जीव अनंत शक्ति का अनुभव करते हैं, जो जीव निरंतर कर्मचोर पुरुषार्थ के माध्यम से ठगे जा रहे हैं,

वह अपने साम्राज्य को नष्ट कर रहे हैं, अतः साम्राज्य को बढ़ाने आए हो या नष्ट करने आए हो। यदि जीवन में सरलता है तो आप आत्मगुणों को प्राप्त करने में लगे हुए हो ।एक मुनिराज तपस्या कर रहे आत्मा के कल्याण हेतु और आप भी भक्ति, पूजा और जिन गुरुओं की उपासना करते हो, लेकिन किन भावों से करते हो।


उक्त बातें दसलक्षण महापर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म के दिन श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर अरिहंत पुरम में आचार्य विनिश्चय सागर मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री प्रवर सागर मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही ।

आपने भक्ति को दो प्रकार से बताते हुए कहा कि एक तो द्रव्य और दूसरी भाव भक्ति, यदि भाव भक्ति चल रही है तो आर्जव धर्म का प्रभाव चल रहा है और यदि भाव भक्ति नहीं है तो कपट का प्रभाव चल रहा है ।पूजन करना तो सरल है, द्रव्य चढ़ाना भी सरल है,

लेकिन आज के दिन उस कपट के भाव को मन के अंदर से निकलना है तभी आर्जव धर्म जीवन में सरलता से आ सकता है। मुनिश्री ने कहा मन में हो सो वचन उचरिये , वचन होय सो तन सो करिए,अर्थात जो मन में है वह तन से हो पा रहा अथवा नहीं और जो तन से कर रहे हो वह मन में है कि नहीं

,जैसे -जैसे धन की वृद्धि हो रही है वैसे -वैसे कपट भी बढ़ रहा है। एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि जब 100 रुपए आते थे तब 100 रुपए का कपट था, 1000 रूपए आते हैं तो कपट 1000 का बढ़ जाता है,ऐसे ही यह कपट निरंतर बढ़ता जा रहा है ।

लेकिन आचार्यों ने कहा जो जीव पुण्यशाली होते हैं उनके पास धन भी रहता और आर्जव धर्म भी रहता है। जिस प्रकार गिरगिट काली मिट्टी पर जाता तो काला हो जाता है और लाल मिट्टी पर जाए तो लाल हो जाता है ,अतः जो व्यक्ति कपटी होते हैं उनके वचनों में सत्यता नहीं होती है।

आचार्य विद्यासागर जी मुनिराज आचार्य देशभूषण सागर जी के पास पहुंचे उन्होंने कहा मैं आपके संघ में रहना चाहता हूं तो आचार्य देशभूषण जी बोले अभी तो आपकी उम्र 20 साल ही है,तुम तो यहां से चले जाओगे, पलायन कर जाओगे, तब विद्याधर जी ने आजीवन सहज ही वाहन का त्याग कर दिया। आचार्य विशुद्ध सागर जी मुनिराज जो कि महान संघ के नायक हैं ,उनके अंदर भी सरलता है उनको देखकर ऐसा लगता है उनने साक्षात समयसार को पढ़ा नहीं है।

लेकिन समयसार को अपने जीवन में उतार लिया है और आचार्य विराग सागर जी जो कि वात्सल्य के बहुत धनी थे कोई भी श्रावक, व्रती, मुनि, आर्यिका कोई भी आ जाए ,उनके साथ सरलता के साथ वात्सल्य देते थे। अतः जीवन में यदि हमें आर्जव धर्म को हृदय में धारण करना है तो सरलता को लाना पड़ेगा और कपट को छोड़ना पड़ेगा।

श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर गंज में वर्षों पुरानी परम्परा अनुसार पर्यूषण महापर्व पर पंचमेरू के समापन पर जलयात्रा निकाली जाती है।गंज मंदिर समिति ने नगर में किला मंदिर पर विराजमान मुनिश्री सजग सागर जी एवं सानंद सागर जी मुनिराज तथा अरिहंत पुरम मंदिर में विराजमान मुनिश्री प्रवर सागर मुनिराज को श्रीफल भेंट कर जलयात्रा में शामिल होने हेतु विनती की।

“शांति धारा एवं अभिषेक कार्यक्रम सम्पन्न”

आज अलीपुर स्तिथ श्री चंद्रप्रभु मंदिर में मुनि श्री प्रवर सागर जी के सानिध्य में शांति धारा एवं अभिषेक कार्यक्रम सम्पन्न हुए । चल रहे पर्युषण पर्व के अंतर्गत आज मुनिश्री ने उत्तम आर्जव धर्म के बारे में प्रवचन के माध्यम से शिविर में बैठे श्रावकों को समझाया । शांति धारा परिवार श्री सुरेश कुमार, वीरेन कुमार श्री कचरामल जैन, धनरूपाल जैन, श्री सुरेश कुमार अमोद कुमार जी प्रमोद कुमार जी जैन आदि शामिल हुए ।

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