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जैन धर्म ज्ञानपरक धर्म है। जैन धर्म में अवतारवाद की कोई अवधारणा नहीं होती है, इसमें यह माना जाता है कि लगातार अपने सुकर्म से ज्ञान अर्जित करके तीर्थंकर पद पाकर आम व्यक्ति भी मोक्ष प्राप्त कर सकता है अर्थात् ज्ञान ही सर्वोपरि है। उक्त तथ्य अपने प्रवचन में साध्वीवर्या नम्रव्रता श्रीजी नें व्यक्त किये।

जारी प्रेस नोट में बताया की
जैन धर्म में पवित्र ग्रंथ आगम ग्रंथो को माना जाता है जिनमें भगवान महावीर स्वामी के उपदेश संकलित है। यही जैन धर्म के दर्शन को व्यक्त करते हैं प्रत्येक जैन अनुयायी इन्हीं ग्रंथो के निर्देशानुसार ही अपनी जीवनचर्या निर्धारित करता है। इन ग्रंथो को पोथाजी भी कहा जाता है। इन्हीं ग्रंथो को लेकर इनकी विधिवत् पूजा-अर्चना के साथ इनकी शोभायात्रा निकाली जाती है।

जिसे पोथाजी का वरघोड़ा भी कहा जाता है। जिसमें भगवान को चांदी की पालकी में भक्तजन पूजा के वस्त्रो में नगर भ्रमण करवाते है। इसी का आयोजन पर्यूषण पर्व के दौरान श्वेताम्बर जैन समाज द्वारा किया गया ।

जिसकी शोभायात्रा श्री मालव गिरनार तीर्थ प्रभु नेमिनाथ के किला स्थित मंदिर से प्रारंभ होकर बड़ा बाजार, बुधवारा, गल चौराहा, कन्नौद रोड स्थित जैन दादावाड़ी , अदालत रोड, सुभाष चौक, जैन श्वेताम्बर गंज मंदिर होती हुई पुनः किला मंदिर पर जाकर सम्पन्न हुई।


इस शोभायात्रा में भगवान की पालकी को आकर्षक ढंग से सजाया गया है जिसें समाजजन पूजा के वस्त्रो में अपने कंधे पर लेकर चल रहे थे। नन्हें बालक नें पोथाजी को अपने सिर पर रखकर पूरी शोभायात्रा करवाई। जगह-जगह पर समाजजनों नें भगवान की पालकी का चावल की गवली करके स्वागत किया।

पूरी शोभायात्रा में बैण्ड के साथ भजन गायक महेश वोहरा नें अपने सुरीले भजनो से समां बांधे रखा। पयूर्षण को विधिवत् सम्पन्न कराने के लिये बाहर से पधारे सधार्मिक बंधुओ ने भी शोभायात्रा में सम्मिलत होकर नगर के श्वेताम्बर जैन समाज का मान बढ़ाया। समाज के सभी ट्रस्टो के अध्यक्ष, पदाधिकारी और समाजजन इस शोभायात्रा में उत्साह के साथ शामिल हुये तथा सभी महिला मण्डलो नें भी अपनी उपस्थिति से शोभायात्रा की गरिमा को बढ़ाया।

पर्यूषण पर्व में अब भगवान का जन्म बड़े ही धूमधाम से दादावाड़ी, स्थानक, गंज मंदिर और किला मंदिर में रविवार को मनाया जायेगा। श्रीसंघ अध्यक्ष पवन सुराणा सहित ट्रस्ट अध्यक्ष रवीन्द्र रांका, नगीन वोहरा, लोकेन्द्र बनवट तथा नगीन सिंगी ने सभी समाजजनो से अपील की है कि जैन श्वेताम्बर समाज का हर व्यक्ति इस प्रभु के जन्म वांचन आयोजन में सम्मिलित होकर जिनशासन की शोभा में अभिवृद्धि करे।

“जैन मुनि सिद्धांत के पक्के होते है वे अपनी चर्या में समझौता नही करते –मुनिश्री सजग सागर
पूज्य बनना है तो भगवान की पूजा-अर्चना भक्ति भाव से करें — मुनिश्री सानंद सागर
कल होगा लोक कल्याणकारी महामंडल विधान का समापन”

जैन मुनि सिद्धांत के पक्के होते है वे अपनी चर्या में समझौता नही करते ,सजग होकर चर्या का पालन करते है। तीन लोक में जैन धर्म उत्तम है। इसका कारण हिंसा न करना है। जैन धर्म सूक्ष्म धर्म है और जीवों की रक्षा करते हैं। व्यर्थ पानी नहीं बहाएं,पानी बहाने से असंख्यात जीवों की हिंसा होती है। जैन धर्म वैज्ञानिक धर्म है।असंख्यात जीवों का कल्याण भगवान महावीर की वाणी करती है।

मन, वचन और काया से धर्म की प्रभावना करें। जैन लोग अच्छा कर्म करते है, इसलिए वह नर्क नहीं जाते है। कुछ लोग मायाचारी करने में पीछे नहीं रहते हैं। धर्म प्रभावना अवश्य करें,कदम -कदम पर धर्म प्रभावना कर सकते हैं। ऐसे काम नहीं करें जिससे आपको दुर्गति में जाना पड़े। भ्रष्टाचार का जमाना है। सच्चे श्रावक बनकर धर्म की प्रभावना करें। त्यागी कौन जो नियमों का पालन करें।

आहार में मायाचारी नहीं करें,सोले का भोजन बनाकर खिलाएं। पूज्य बनना है तो भगवान की पूजा-अर्चना भक्ति भाव से करें । उक्त बातें नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर चातुर्मास हेतु विराजमान आचार्य आर्जव सागर मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री सजग सागर जी एवं सानंद सागर मुनिराज ने

सोलह कारण पर्व पर लोक कल्याण महामंडल विधान के दौरान आशीष वचन देते हुए कही।पूज्य मुनिश्री सजग सागर मुनिराज ने कहा कि पैसा तो खूब कमालोगे लेकिन धर्म साधना नही तो कुछ नहीं किया। आपके द्वारा किया गया धर्म ही मोक्ष का साधक है। कितने ही लोग बत्तीस दिनों के सोलह कारण व्रत अंगीकार कर रहे है,ज्ञान की प्रभावना बहुत अलग ही होती है।कही महामारी नही होती,तीर्थंकर का प्रभाव होता है।

सोलहकारण व्रत का प्रभाव है, भावना सोलह कही गई है,इन्हें आप भाकर ही अंतिम लक्ष्य तीर्थंकर बन सकते है। मुनिगण पहले आहार पर निकलते थे तो दो – दो ,चार- चार माह तक विधि नही मिलने के कारण आहार ग्रहण नही करते थे और अंत मे समाधि मरण कर मुक्ति प्राप्त कर लेते थे।मुनिश्री ने कहा यह जो सोलह दिवसीय विधान आपने पूर्ण भक्ति भाव के साथ किया है, यह भक्ति आपको भव -भव से मुक्ति की राह दिखाएगी‌।मुनिश्री सानंद सागर मुनिराज ने कहां अब समय विधान के समापन का आ गया है।आज प्रभावना की बात है।

विधान का समापन कल 23 अगस्त शनिवार को हवन के साथ होगा। आपने कहा यहां पर ऐसे भी श्रावक है जो अकेले ही पूरा चातुर्मास करा देवे।क्षमा सागर मुनिराज का वृत्तांत आपने सुनाया। रात्रि में भोजन सामग्री नहीं बनाए। मुनिश्री सानंद सागर मुनिराज ने कहां अहंकार कभी नहीं करें, विवेक पूर्वक काम करें। पूज्य बनना है तो भगवान की पूजा-अर्चना करना होगी,पूजा पूज्य बनाती है।यही सच्चा मार्ग है।पुण्याणुवंदी पुण्य बढ़ाएं।

वीतरागी धर्म के अनुयाई हैं।मोक्ष जाने के लिए उसका बीजारोपण करें। धर्म सभा के पहले पंडित प्रदीप शास्त्री बीना ने राष्ट्रीय ध्वज के बैनर तले वात्सल्य के पर्व रक्षाबंधन पर शानदार नाटिका प्यारी बहना का मंचन कराया। शुक्रवार 8 अगस्त से प्रारंभ हुए लोक कल्याण महा – मंडल विधान का 23 अगस्त को समापन होगा।

पंडित प्रदीप शास्त्री ने कहा दान की महिमा अपरम्पार है। विधान के मुख्य मंगल कलश प्राप्त करने के लाभार्थी अरुण कुमार आरती जैन प्रगति, चार कलशों के लाभार्थी संजय -विजय जैन,पारस जैन महिपाल जैन सामरदा वाले ,सुमत जैन स्वास्तिक, मुकेश आनंद जैन पोरवाल एवं भगवान के समक्ष रखें कलश के लाभार्थी राजेश कुमार विपिल कुमार जैन परिवार रहे ।

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