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हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया पर अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 30 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। खास बात ये है कि इस बार अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग बनेगा। जिसके चलते इस दिन की गई पूजा, उपाय, हवन आदि का श्रेष्ठतम फल मिलेगा। इस दिन की गई खरीदी भी शुभ फल देने वाली रहेगी।

“17 साल बाद रोहिणी नक्षत्र और बुधवार का संयोग”

ज्योतिषाचार्य पं डॉ दीपेश पाठक ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन रोहिणी नाम का नक्षत्र रहेगा। बुधवार को रोहिणी नक्षत्र और अक्षय तृतीया का संयोग 17 साल पहले 7 मई 2008 को बना था। इस शुभ संयोग में दीर्घावधि का निवेश कईं गुना लाभ देगा। अब ऐसा शुभ संयोग 27 साल बाद यानी 2052 में बनेगा। अक्षय तृतीया पर बन रहे इस शुभ संयोग के चलते आम जनमानस अपने अनुकूल वस्तु खरीद कर श्रीलक्ष्मी नारायण की कृपा प्राप्त कर सकते है।

“कब है अक्षय तृतीया ?”

नगरपुरोहित पं मनीष पाठक ने जानकारी देते हुए बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल 2025 को शाम 5:31 से शुरू होकर 30 अप्रैल 2025 को दोपहर 2:12 पर खत्म होगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है इसीलिए अक्षय तृतीया का पूजन 30 अप्रैल को किया जाएगा। अक्षय तृतीया के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है।

“अक्षय तृतीया का महत्व”

पं पाठक के अनुसार अक्षय तृतीया एक ऐसी तिथि है जिस दिन आप कोई भी शुभ कार्य किसी समय बिना मुहूर्त के भी कर सकते हैं क्योंकि इस दिन अबूझ मुहूर्त रहता है। इस दिन आप किसी नए काम की शुरुआत विवाह मुंडन आदि कर सकते हैं। इस दिन आप अगर सोना खरीदने में सक्षम नहीं हैं तो फिर मिट्टी का मटका या फिर पीतल की वस्तु पीली सरसों भी खरीद सकते हैं। साथ ही इस दिन आप नए मटके की पूजा कर सकते हैं इससे घर में सुख शांति का आगमन होता है।

“पौराणिक कथा”

मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन सतयुग त्रेता युग और द्वापर युग की शुरुआत हुई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया था और मां गंगा का धरती पर अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। यही नहीं चारधाम यात्रा की शुरुआत भी अक्षय तृतीया से ही होती है, जिससे इसका महत्व और अधिक हो जाता है।

“अक्षय तृतीया पर यह करे”

इस दिन समुद्र या गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए।
प्रातः पंखा, चावल, नमक, घी, शक्कर, साग, इमली, फल तथा वस्त्र का दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा भी देनी चाहिए।
ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए
इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।
आज के दिन नवीन वस्त्र, शस्त्र, आभूषणादि बनवाना या धारण करना चाहिए।
नवीन स्थान, संस्था, समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन भी आज ही करना चाहिए।

आप सभी को अक्षय तृतीया पर्व की बधाई शुभकामनाएं

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