ऊंट कब किस करवट बैठेगा यह एक प्रचलित हिंदी कहावत है । इसमें “ऊँट” और “करवट” खास है । इसका मतलब यह है की ऊँट के बैठने का ढंग ऐसा होता है कि उसके बैठने से पहले यह सहज रूप से अनुमान लगाना कठिन होता है कि वह किस दिशा/तरफ झुकेगा अर्थात किस करवट बैठेगा। इसी से यह प्रतीकात्मक अर्थ बना कि परिणाम अभी अनिश्चित है।
यही कहावत/बात,आज मार्च में उभर कर सामने आई है । 15 दिनों से उथल पुथल मची हुई है । सोचा आज बिन बजे उन घुंघरुओं को ही बजाने के प्रयास किये जायें,वैसे हमारे घुंघरू बजते तो है पर ये हर किसी को सुनाई नही देते है । खास कर के उन लोगो को जिनके कानो में हर दम चांदी की ही खनक सुनाई देती है । लेकिन उनको शायद ये नही मालूम की अगर सब जगाह केवल चांदी की ही खनक सुनाई देती तो कोठों पर कभी पीतल के घुंघरुओं की आवाज सुनाई नही देती..?

ये घुंघरू जो बजते नही है,पर सुनाई जरूर देते है…
आज जब, जो अनिश्चितता का ऊंट खड़ा हुआ है और ये आज भी किसी को मालूम नही है की वो किस करवट बैठेगा तब इस में चांदी के जूतों को लिये घूमने का कोई अर्थ नही है । चलो मान भी लो की चांदी के जूते के आगे अगर ऊंट की करवट बदल भी गई तो क्या अंतरआत्मा को ये मंजूर होगा । जो व्यक्ति दिये जलाने में जीव हिंसा मानता हो,आज उसका,बिन जले दिया दिन रात फड़फड़ा रहा है । कभी सोचा की आज ये दिन क्यो सामने आया है.? शायद चांदी की खनक ने ऐसा कभी सोचने का अवसर ही नही दिया होगा । लेकिन ध्यान रखना किये कर्म आज नही तो कल,कल नही तो परसो लौट कर जरूर आते है,जब कर्मो ने अहिंसा के अवतार,करुणा के सागर तीनो लोको के नाथ भगवान महावीर स्वामी को नही छोड़ा तो,आप ओर हम किस खेत की मूली है । जो कर्म चाहे वो चांदी की चकाचोंध के कारण बांधे हो,जाने में बांधे हो या अनजाने में बांधे हो,एक दिन उन कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है,ओर उन कर्मो से कोई छुड़ा भी नही सकता है,हाँ अच्छे,पुण्य के कार्य कर उन कर्मो को हल्का जरूर कर सकते है । अब आज ये बड़ा प्रश्न खड़ा हुआ है की..
“ऊँट किस करवट बैठेगा” तो भैय्या
“ऊँट किस करवट बैठेगा,यह तो समय आने पर(48 घंटे) के बाद ही पता चलेगा। ऊंट किस करवट बैठेगा
इसका अर्थ है—किसी मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा,यह अभी निश्चित नहीं है। परिस्थितियाँ किस दिशा में जाएँगी या कौन-सा पक्ष दोषी होगा,कौन निर्दोष होगा,इसका पता परिणाम आने के बाद में ही चलेगा।

अर्थात जब किसी व्यक्ति को यह मालूम नहीं होता कि आखिर फैसला किसके पक्ष में होगा या घटनाक्रम किस दिशा में जाएगा,तब इस कहावत का ही उदाहरण दिया जाता है। अब फिर प्रश्न खड़ा हुआ है की यह कहावत
किस संदर्भ में कही जाती है? तो
यह कहावत खास तौर पर अनिश्चित स्थिति, मुकाबले, चुनाव, विवाद, सौदेबाजी या किसी फैसले के संदर्भ में कही जाती है। इसको अच्छे से समझने के लिये उदाहरण के रूप में माने की चुनाव में दो प्रत्याशी खड़े हुए है,दोनों प्रत्याशियों की स्थिति मजबूत है,इसलिए अभी कहना मुश्किल है कि ऊँट किस करवट बैठेगा। सब अपनी-अपनी जीत का दावा भी कर रहे हैं,लेकिन ऊँट किस करवट बैठेगा, यह फैसला आने के बाद ही पता चलेगा। जनता,अधिकारियों,दलों के नेता तथा जिनको इसमें रुचि होती है उनके बीच यही चर्चा चलती है की देखते है, ऊँट किस करवट बैठता है।

ये घुंघरू जो बजते नही है,पर सुनाई जरूर देते है…..
ऊंट किस करवट बैठेगा,परिणाम क्या आयेंगे ये सब अपनी जगाह है,लेकिन क्या कभी किसी ने भी सोचा की उस समाज का क्या होगा,उस परिवार का क्या होगा,जो चला गया और पीछे बहुत सारे प्रश्न छोड़ गया,परिवार के सामने बहुत सारी चुनोतियो को छोड़ गया,आखिर सभी पक्ष इन सब छोड़े गये प्रश्नों पर विचार क्यो नही कर रहे है,क्यो राजनीति का प्रवेश हुआ,क्यो राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है,आखिर सभी अपने अपने समाज की मान, मर्यादा,प्रतिष्ठा,छबि को लेकर गम्भीर नही है.?
साथ मे जिस परिवार का कुल दीपक चला गया,बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया,एक पत्नि का सिंदूर चला गया,एक पिता का पुत्र चला गया.. क्या समाजों के जिम्मेदारों को इन सब प्रश्नों पर विचार नही करना चाहिए।?,क्या मासूम बच्चों के लालन पालन को लेकर उनकी शिक्षा,को लेकर नही सोचना चाहिये.?,देखो जिम्मेदारों आज भी समय है सब एक जाजम पर बैठो,सोचो,विचार करो । जो हो गया वो तो निश्चित बहुत ही दुखदायी हुआ,जो घटना घटी वो दुख ओर पीड़ा देने वाली ही है,लेकिन अब सबसे बड़ी ओर पहली प्राथमिकता सभी पक्षो की यही होना चाहिये कि किस तरह पीड़ित की सहायता की जाये,दोषी को सजा भी मिले,निर्दोष को फंसाया भी नही जाये और पीड़ित की सहायता भी हो और न्याय भी मिले क्या ऐसा करने के लिये समाजों के प्रमुख,जिम्मेदार आगे आयेगे.? या फिर मौत पर राजनीति की रोटी ही सेकी जायेगी..? जिधर से भी राजनीति की रोटी सेकी जा रही है उन चेहरों को भी पहचानो,वे कौन है.?,कहा से आये है.?उनका उद्देश्य क्या है.? जब हर समस्या का हल बातचीत से अच्छे से निकल सकता है,तो बातचीत जरूर करे ताकि पीड़ित को न्याय और संबल मिल सके.?

























