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भोपाल। भारत को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र बनाना है तो स्वदेशी अपनाना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने संबोधनों में कई बार स्वदेशी के महत्व को रेखांकित कर चुके हैं। जब भी कोई विदेशी अतिथि भारत आता है, तो प्रधानमंत्री उसे स्वदेशी उत्पाद भेंट कर देश की परंपरा और सामर्थ्य से परिचित कराते हैं।

यह बात भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन द्वारा शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में आयोजित स्वदेशी मेले के 11वें दिन कही। स्वदेशी मेला 24 अक्टूबर से 4 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है।

“स्वदेशी मेले का आयोजन प्रदेश के सभी 55 जिलों में हो : आलोक शर्मा,सांसद भोपाल”

सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल का गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति रही है। शहर में स्वदेशी मेले के आयोजन की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। इसके लिए उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच को धन्यवाद देते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से इस दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उनकी इच्छा है कि इसी तरह के स्वदेशी मेले मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में आयोजित किए जाएं।

ऐसे आयोजन अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों और उनके प्रयासों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने भोपाल में अपने कार्यकाल के दौरान भोपाल मेले की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि अब शहर में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी मेले का आयोजन होना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने सुझाव दिया कि आने वाले समय में रानी कमलापति की स्मृति में भी मेले का आयोजन किया जाना चाहिए।

“देश को मजबूत बनाने के लिए समाज को भी आगे आना होगा : मनोरंजन मिश्रा”

भाजपा मध्य प्रदेश के मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा ने कहा कि वर्ष 1991 में जब पूरी दुनिया में वैश्वीकरण की चर्चा हो रही थी, उस समय स्वदेशी के विचार पर भी गंभीर विमर्श शुरू हुआ था। भोपाल में अध्ययन के दौरान उन्होंने पहली बार स्वदेशी के बारे में सुना था। उस समय उम्र कम होने के कारण इसकी व्यापकता को समझ नहीं पाए थे, लेकिन आज मेले में वक्ताओं के विचार सुनकर और यहां की गतिविधियों को देखकर स्वदेशी का महत्व समझ में आता है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को भी समझना जरूरी है। जापान जैसे देशों ने अपने भीतर स्व का भाव जागृत करके प्रगति की है। भारत में भी पहले स्थानीय व्यवस्थाओं और परंपराओं के आधार पर समाज का संचालन होता था। अंग्रेजों के शासन के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन की जो व्यवस्थाएं आईं, स्वतंत्रता के बाद भी काफी हद तक उन्हीं पद्धतियों को अपनाया गया।

मिश्रा ने कहा कि देश को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं हो सकती। हर काम सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे आना होगा। जब प्रत्येक व्यक्ति और समाज अपने भीतर स्व का भाव जागृत करेगा, तभी भारत वास्तविक रूप से मजबूत बन सकेगा।

“कृषि और गांवों को स्वदेशी से जोड़ना जरूरी : सर्वज्ञ दीवान”

भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कहा कि स्वदेशी का भाव कृषि और गांवों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। वे स्वयं कृषि क्षेत्र से आते हैं। आज खेती में केवल उर्वरक ही नहीं, बल्कि बीज जैसी जरूरी चीजों के लिए भी विदेशी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि गांवों का जीवन और कृषि व्यवस्था पहले पूरी तरह स्वदेशी पर आधारित हुआ करती थी।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल खानपान या वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे अपनी पूरी जीवनशैली और दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। गांवों के लोगों और किसानों को मजबूत करने से ही देश मजबूत होगा।

“स्वदेशी विचार को व्यवहार में उतारने का समय : साकेत सिंह राठौड़”

मेले की प्रस्तावना रखते हुए स्वावलंबन भारत फाउंडेशन के सीईओ संकेत सिंह राठौड़ ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ एक लड़ाई समाप्त हुई थी, लेकिन उसी वर्ष आर्थिक लड़ाई की शुरुआत भी हो गई थी। आज यह लड़ाई अपने अंतिम चरण में है। पूरी दुनिया वैश्वीकरण से स्थानीयकरण की ओर बढ़ रही है और स्वदेशी का विचार इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


उन्होंने कहा कि स्वदेशी के क्षेत्र में काम करने के लिए कई बार 500 से 1000 करोड़ रुपये तक की लागत आती है। इस निवेश का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी विदेशी कंपनी हर साल भारत से लगभग 7000 करोड़ रुपये कमाती है, जबकि पेप्सी जैसी कंपनी कार्बोनेटेड पेय पदार्थों के कारोबार से हर साल करीब 500 करोड़ रुपये कमाती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था कहे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते प्रभाव से दुनिया के कई देश चिंतित हैं। उन्होंने अल्मोड़ा के एक युवक द्वारा तकनीक के क्षेत्र में किए गए नवाचार का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। अब स्वदेशी का समय आ गया है। जरूरत इस बात की है कि हम इसमें अपना कितना योगदान देते हैं।

“दिन के 24 घंटों में राष्ट्र के लिए अपने योगदान पर हुआ विचार-विमर्श”

मेले में प्रतियोगिताओं से अलग राष्ट्र उत्थान के विषय पर उपस्थित लोगों के बीच विचार-विमर्श किया गया। इसमें यह प्रश्न रखा गया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दिन के 24 घंटों में से कितना समय और किस प्रकार देश के लिए समर्पित कर सकता है। राष्ट्र के लिए योगदान का अर्थ केवल किसी विशेष गतिविधि से नहीं, बल्कि अपने दैनिक कार्यों के माध्यम से देश को मजबूत बनाने से है। इस दौरान शिक्षा, संगीत और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों से विचार किया गया कि वे अपने कार्यों के जरिए राष्ट्र निर्माण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक नृत्य, गायन और वादन सहित विभिन्न रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं।
कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के सीईओ साकेत सिंह राठौड़, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, भाजपा मध्य प्रदेश के मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा, भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संचालक संजीव शर्मा, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी, शोभराज सुखवानी, अजय सोनी, अभिषेक तिवारी, हरिओम सेन महेंद्र चौहान, वीरेंद्र पटेल, अश्विनी कुमार,सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।

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