आष्टा । जिला कांग्रेस कमेटी सीहोर के अध्यक्ष राजीव गुजराती द्वारा मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी तथा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अनुमोदन उपरांत जिला कांग्रेस कार्यकारिणी घोषित कर दी गई है।

जिला कांग्रेस कमेटी के गठन उपरांत जिला कांग्रेस कमेटी सीहोर के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व नपा अध्यक्ष कैलाश परमार ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल कार्यकाल हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।


जिला कार्यकारिणी में आष्टा विधानसभा क्षेत्र से उपाध्यक्ष के रूप में शोभाल सिंह मुगली, कमल सिंह चौहान, महासचिव के रूप में एडवोकेट सुरेन्द्र सिंह परमार, राजेन्द्र भरेवा, इदरीस मंसूरी, जितेन्द्र शोभाखेड़ी, सुनील कटारा एवं सचिव के तौर पर श्रीमती गीता नरेन्द्र कुशवाह,


अर्जुन सिंह अजय, चंदर सिंह ठाकुर, प्रेम पटारिया, संजय पाटीदार तथा सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में अमित पटेल एवं युवा एडवोकेट पल्लव प्रगति को मनोनीत किया गया है। साथ ही अंचल के वरिष्ठ नेताओं को स्थाई आमंत्रित एवं विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में समायोजित किया गया है ।


इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कैलाश परमार ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गौरवमयी इतिहास त्याग, तपस्या, समर्पण और कुर्बानी का इतिहास रहा है। यह वही पार्टी है जिसने देश की स्वतंत्रता से लेकर राष्ट्र निर्माण तक अपनी महती भूमिका निभाई है। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा ही इस देश की एकमात्र ऐसी सर्वसमावेशी विचारधारा है, जो ‘सर्व धर्म समभाव’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के शाश्वत मूल्यों को चरितार्थ करती है।


कांग्रेस ने सदैव देश को जोड़ने का कार्य किया है।” पूर्व नपाध्यक्ष परमार ने आगे कहा कि आष्टा विधानसभा सहित जिले के सभी नवनियुक्त पदाधिकारी पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण भाव से संगठन को ग्राम एवं बूथ स्तर तक मजबूत करने का कार्य करेंगे और आमजन की आवाज बनकर उनके हक की लड़ाई लड़ेंगे।


घोषित कांग्रेस की जिला कार्यसमिति में यू तो आष्टा के सभी गुटों को स्थान दे कर गुटबाजी थामने की कोशिश की गई है । घोषित कार्यसमिति में फिर भी परमार गुट भारी पड़ा है । वही कार्यसमिति घोषित होते ही विरोध के स्वर भी सोशल मीडिया पर मुखर हो गये है । जब आसंतोष उभरते देखा तब इसको लेकर स्वयं जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती को सामने आना पड़ा । गुजराती का कहना है कि भोपाल के निर्देश पर ही 51 पदाधिकारियों को शामिल किया है । एक दो दिन में विरोध के मुखर स्वर खुल कर भी सामने आ सकते है ।

























