आज दोपहर में जैसे ही पुलिस पीआरओ की ओर से जारी “नशे से दूरी,है जरूरी-2.0” की सीहोर जिले में अपार सफलता का समाचार मिला,पढ़ कर अच्छा लगा । क्योकि पूरे सीहोर जिले में शुरुआत में नवागत जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमति सोनाक्षी सक्सेना जी के नेतृत्व में ओर आखरी आखरी में नवागत अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक डॉ प्रशांत चौबे का भी मार्गदर्शन मिलने से इस जन जागरूकता अभियान ने सफलता के झंडे गाड़ दिये । “सफलता के झंडे गाड़ने” शब्द का उपयोग मेने खाकी को खुश करने के लिये या खाकी से डरते हुए,के तहत नही लिखे ।

इन शब्दों को लिखने के पीछे वो बड़ा 55 लाख का आंकड़ा है जहाँ 15 दिन में जिला पुलिस,जिले के सभी थाना क्षेत्रों में हर आम और खास तक नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान के तहत पहुची है । इसके लिये जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमति सोनाक्षी सक्सेना एवं अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक डॉ प्रशांत चौबे के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में जिले की पुलिस विभाग की पूरी टीम बधाई की पात्र है । निश्चित इसके अच्छे परिणाम भी आयेंगे क्योकि हम आशावादी है,निराशावादी नही है । प्रयासों के बाद भी अगर सफलता नही मिले तो इसका ये मतलब नही की प्रयासों को छोड़ दे । अब जब समाज मे फैली नशे की इस बुराई के खिलाफ इतना बड़ा सफल अभियान जब पुलिस चला सकती है तो क्या वो ही पुलिस जिले में ग्राम ग्राम,शहर शहर फैली एक ओर बड़ी सामाजिक बुराई का प्रतीक “जुएं-सट्टे” के खिलाफ ठीक ऐसा ही बड़ा अभियान क्यो नही चला सकती है ? निश्चित चला सकती है ।

क्योकि ये बुराई भी नशे की बुराई से किसी भी रूप में कम नही है । इस बुराई के खिलाफ अगर अभियान शुरू होता है तो निश्चित इस अभियान से उन लोगो को बड़ी परेशानी होगी जिनका इस सामाजिक बुराई से हित जुड़ा होगा । सामाजिक बुराई के इस अवैध,गैरकानूनी कार्य से,या उसका संरक्षण सहयोग करने से किसी के हाथों की खुजली भी मिटती है तो किसी की जेब का बजन भी बढ़ता है क्योंकि ये बुराई खुजली मिटाये बिना या जेब का बजन बढ़ाये बिना फलफूल ही नही सकता है । हाथ की खुजली किसकी मिटती है,जेब का बजन किसका बढ़ता है ये जांच का विषय है।

वही अगर इस सामाजिक बुराई से कुछ के घर पलते है तो वही दूसरी ओर उससे कई गुना अधिक घर बर्बाद भी होते है । सीहोर जिला जुए सट्टे की बड़ी मंडी के रूप में अपनी पहचान इस क्षेत्र में बना चुका है । इसका नेटवर्ग भी कोई छोटा नही है ।

इसका नेटवर्ग तोडना भी पुलिस के लिये एक बड़ी चुनोती तो है,लेकिन पुलिस चुनोतियो से नही घबराती है,बल्कि जब वो चुनोतियो को स्वीकार कर लेती है तब अच्छे अच्छे की हवा निकल जाती है..! अब देखना है की क्या जिला पुलिस जुए सट्टे के फैले बडे नेटवर्ग को तोड़ने के अभियान के घुंघरू कब बजते है..?























