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आष्टा । भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार विशेष शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 28 अगस्त, शुक्रवार को पड़ रहे रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा।

“नही है भद्रा का साया”

ऐसे में बहनों को भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए पूरे दिन अनुकूल समय मिलेगा। खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

“नगर पुरोहित मनीष पाठक क्या कहते है..।”

नगरपूरोहित पं मनीष पाठक ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन से एक दिन पहले ही 27 को भद्रा लग कर समाप्त हो जाएगा। सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह 9 : 11 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9: 50 मिनट तक रहेगी। उसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। हालांकि उदया तिथि के प्रभाव से 28 अगस्त को पूरे दिन पूर्णिमा तिथि ही मान्य रहेगी। पर्व उदया तिथि पर ही मनाया जाएगा। इसलिए 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। साथ ही श्रवण पूजन व द्विज पुरुषों का श्रावणी पर्व भी इसी दिन संपन्न होगा।

“डॉ दीपेश पाठक का यह कहना है”

ज्योतिषाचार्य पं डॉ दीपेश पाठक के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन शुक्रवार को पड़ रहा है। शुक्रवार को मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा दिन माना जाता है। इसी दिन मां लक्ष्मी ने राजा बली को रक्षा सूत्र बांधकर भगवान श्रीविष्णु को राजा बलि के संकल्प से मुक्त कराया था इसके अलावा रक्षाबंधन के दिन चंद्रमा की पूर्ण कलाओं में स्थिति को भी पारिवारिक और भावनात्मक संबंधों के लिए शुभ माना जा रहा है।

इन संयोगों के कारण इस बार का रक्षाबंधन विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्योतिष डॉ पाठक ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल को विशेष रूप से देखा जाता है।
मान्यता के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने से परहेज किया जाता है। इस बार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए दिन में राखी बांधने में भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा।

“रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त”

पं पाठक ने बताया कि उज्जैन सूर्योदय अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त निम्न रहेंगे

चार,लाभ,अमृत प्रातः 06.21 से प्रातः 11.04 तक

शुभ का मुहूर्त दोपहर 12.19 से 02.14 तक

चर,का मुहूर्त शाम को 05.23 से 06.58 तक

लाभ का मुहूर्त रात्री 09.35 से 10.58 तक

“चंद्रग्रहण प्रभाव”

पूर्णिमा पर लगने बाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। शास्त्रों का स्पष्ट विधान है कि जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए भारत में इसका कोई दोष या अशुभ प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस लिए 28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन का पर्व किसी भी शुभ मुहूर्त में मनाया जा सकता है।

“पार्वती तट पर श्रावणी पर्व सम्पन्न होगा”

मां पार्वती के पावन तट और नगर के प्राचीन शंकर मंदिर के परिसर में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी प्रातः 08.30 बजे से वेदों के रचयिता ऋषियों का स्मरण और तर्पण करते हुए और वेदों के अध्ययन और वैदिक जीवन जीने का संकल्प लेकर द्विज पुरुष पुराना जनेऊ उतारकर नया यज्ञोपवीत धारण करेंगे।

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