आष्टा । सागर के बंडा में नकली शराब के पीने से कई लोगो की मौत की खबर के बाद से ही मप्र सरकार इस घटना को लेकर सख्त नजर आ रही है । घटना के बाद पूरे प्रदेश के साथ सीहोर जिले में भी सोया आबकारी विभाग नींद से जाग गया है,ओर अवैध शराब निर्माण,बिक्री स्थलों,ढाबों, होटलों सहित अन्य संदिग्ध अवैध शराब बिक्री केंद्रों पर छापे मार रहा है ।


छापे में आबकारी विभाग को सफलता भी मिल रही है । सीहोर जिले में कलेक्टर श्री बालागुरु के. के निर्देशानुसार जिला आबकारी विभाग द्वारा जिले में अवैध मदिरा के विनिर्माण, संग्रहण, परिवहन एवं क्रय-विक्रय के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत आबकारी वृत आष्टा में जावर रोड़ क्षेत्र में बड़ी कार्यवाही की गई ।


जिला आबकारी अधिकारी दीपसिंह राठौर ने बताया कि आबकारी वृत आष्टा में जावर रोड़ क्षेत्र में सहायक जिला आबकारी अधिकारी राजेश विश्वकर्मा एवं जिला आबकारी बल के नेतृत्व में अवैध मदिरा के विरुद्ध कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान जावर जोड़ के पास से 04 प्लास्टिक की बोरियों एवं 01 प्लास्टिक की कैरेट में 350 पाव देशी प्लेन मदिरा,


72 पाव बीयर केन,11 बोतल ओल्ड मंक,07 बोतल लंदन प्राईड, 12 बोतल सेन्ट्रल प्रोवेन्स, 75 पाव 08 पीएम इस प्रकार कुल 135 ब.ली. देशी-विदेशी मदिर जप्त कर आरोपियों के विरूध्द मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 (2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। जप्त मदिरा का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 67,230 रूपये है। अवैध मदिरा के विरूध्द अभियान निरंतर जारी रहेगा।

“नगरीय निकायों के उप निर्वाचन स्थगित”
सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दिनेश श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि नगरीय निकायों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 का जो कार्यक्रम घोषित किया गया था। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों (स्थानीय निर्वाचन) से प्राप्त प्रस्तावों पर आयोग द्वारा विचारोपरान्त नगरीय निकायों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 आगामी आदेश तक स्थगित कर दिये गये है। इनके लिये पृथक से कार्यक्रम जारी किया जायेगा।


“पर्यूषण महापर्व को धर्म आराधना, त्याग और तपस्या से बनाएं महिमामय : मुनि वीरतेन्द्र महाराज
प्रतिक्रमण की महिमा समझें, मन और आत्मा पर रखें नियंत्रण; जीवों के प्रति प्रेम व दया का भाव रखें”

पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के अवसर पर श्री नेमिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर किला के उपाश्रय में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि वीरतेन्द्र महाराज ने कहा कि टेढ़े काम करने वाला टेढ़ा ही रहेगा और सीधे काम करने वाला सीधा रहेगा।

इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में भगवान और धर्म के प्रति समर्पण भाव रखते हुए मन एवं आत्मा पर नियंत्रण रखना चाहिए। पर्यूषण जैसे महापर्व को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं,बल्कि धर्म आराधना, त्याग और तपस्या के माध्यम से महिमामय बनाना चाहिए।

मुनि श्री ने पर्यूषण महापर्व में 17 प्रतिक्रमण, 17 कर्तव्य और 17 प्रवचन सुनने का महत्व बताया गया है। प्रत्येक श्रावक को प्रतिक्रमण की महिमा समझनी चाहिए। प्रतिक्रमण अत्यंत मांगलिक साधना है। गुरु महाराज साधकों के मन में प्रतिक्रमण की भावना का वास कराते हैं। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति अत्यधिक प्रमादी होता जा रहा है। बिना समझे किसी को ज्ञान देने के बजाय पहले स्वयं धर्म को समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पर्यूषण के दौरान प्रतिदिन किए जाने वाले पांच कर्तव्यों का विशेष महत्व है। इनमें अमारी प्रवर्तन, साधर्मिक वात्सल्य, क्षमापना, अट्ठम तप तथा अंतिम चैत्य परिपाटी प्रमुख हैं। धर्म की बातें सुनने से कान भी निर्मल होते हैं। मनुष्य को सभी जीवों के प्रति प्रेम और दया का भाव रखना चाहिए तथा अनावश्यक रूप से भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए।

मुनि वीरतेन्द्र महाराज ने तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तपस्वियों के बहुमान से समाज के अन्य लोगों को भी तप और संयम की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण तपस्वियों को गाजे-बाजे के साथ मंदिर ले जाकर उनका सम्मान किया जाता है।

उन्होंने कहा कि केवल संवत्सरी के अवसर पर ही उपवास न करें, बल्कि भावपूर्वक तपस्या और उपवास का संकल्प लेना चाहिए। साधक अपनी सामर्थ्य के अनुसार छह माह तक की तपस्या भी कर सकते हैं।

उन्होंने अकबर बादशाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक तपस्वी की कठोर तपस्या देखकर अकबर भी प्रभावित हुआ था और उसके मन में तपस्या के प्रति श्रद्धा का भाव जागा। उन्होंने कहा कि हमारे भगवान वीतरागी हैं, उनके मन में किसी के प्रति राग-द्वेष नहीं रहता। हमें भी उनके बताए मार्ग पर चलते हुए राग-द्वेष से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।

भगवान की देशना का कभी अनादर न करें : पन्यास प्रवर यशोजीत विजय महाराज
इस अवसर पर पन्यास प्रवर यशोजीत विजय महाराज ने कहा कि साधु निर्ग्रंथ एवं दयाभावी होते हैं। भगवान की देशना का कभी अनादर नहीं करना चाहिए। पर्यूषण महापर्व के दौरान जितना अधिक संभव हो, उतनी धर्म आराधना, त्याग और तपस्या करनी चाहिए तथा स्वयं को राग-द्वेष से दूर रखने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पर्यूषण आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि का पर्व है। इस दौरान साधना के साथ क्षमा, संयम और जीवदया की भावना को जीवन में उतारना चाहिए। धर्म केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि उसे आचरण में उतारना ही वास्तविक धर्म आराधना है।स्थानक पर आराधना कराने वाले श्री धर्मदास जैन स्वाध्याय संघ, थांदला के संजय मूणत झाबुआ एवं मनीष शाह थांदला। गंज मंदिर जी में अ.भा. स्वाध्याय महासंघ के रिद्धिवर्धन खाबिया (कुकड़ेश्वर) एवं संयम जैन (डग) करा रहे हैं।


























