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ब्रह्मानंद जन सेवा संघ माँ कृष्णा धाम मालीपुरा आष्टा के पावन तत्वावधान, और श्रद्धेय माँ कृष्णा जी के पावन सानिध्य में आयोजित पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के तृतीय दिवस पर देश के कहीं हिस्सों से पधारे भक्तों ने सत्संग का लाभ लिया आज के सत्संग में भुरू जी मुकाती हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष आष्टा, नरेंद्र जी कुशवाह सकल हिंदू समाज अध्यक्ष आष्टा, जीवन सिंह जी मंडलोई जिला पंचायत उपाध्यक्ष सीहोर, उपस्थित रहे आश्रम महिला मंडल की साधीकाओं ने भगवान को 56 व्यजनों का भोज लगाया

दिनांक 29 जुलाई को माँ कृष्ण जी के जन्मदिवस पर आष्टा में भव्य शोभायात्रा निकलीं जाएगी जो गायत्री मंदिर बस स्टैंड आष्टा से प्रारंभ होकर होगी जिसका समापन मुकाती पेट्रोल पंप पर होगा
अमृत महोत्सव एवं दिव्य सत्संग कार्यक्रम में परम पूज्य कृष्णा माँ ने कहा कि बच्चों को जीवन में तीन चीजों की आवश्यकता होती है। माता-पिता और गुरु,। माता बच्चें का निर्माण करती है पालन पोषण करती हैं। और वयस्क होने तक संभालती है। पिता पढ़ता है, लिखना है और जीवन में योग्य बनाता है।

और गुरु जीवनजिनें कि कला सिखाता है माता पिता तो 60 शाल तक बच्चों को सम्हालते है किन्तु गुरु 60 जन्मों तक संभलते है।उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भगवान सबको संभालता है। तो फिर भगवान को कौन संभालता है। कई उदाहरण देते हुए कृष्णा मां ने बताया कि भगवान को केवल भक्त ही संभालते हैं।

नारी शक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि हम इंसानों की दो हाथ होते हैं, और देवताओं के चार हाथ होते हैं, पर देवी शक्ति की आठ हाथ (भुजाएं) होती है। उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मूर्तिकार छेनी हथोड़ी से मूर्ति को तरास्ता है उसी तरह गुरु अपनी वाणी रूपी छेनी हथोड़ी से शिष्य को तरास्ते है।

“प्रजापति समाज के गौरव राजा दक्ष प्रजापति के जन्मोत्सव पर प्रजापति समाज का निकला चल समारोह,विधायक हुए शामिल,समाज बंधुओं का किया स्वागत”

प्रजापति समाज के गौरव राजा दक्ष प्रजापति जी के जन्मोत्सव पर आज प्रजापति समाज आष्टा का विशाल चल समारोह बायपास से निकाला गया जिसका समापन पार्वती नदी पर हुआ ।

प्रजापति समाज के निकले उक्त चल समारोह में विधायक श्री गोपालसिंह इंजीनियर,पूर्व जिला मीडिया प्रभारी सुशील संचेती, नगर भाजपा अध्यक्ष प्रतिनिधि विशाल चौरसिया,महेंद्रसिंह ठाकुर,महामंत्री धनरूपमल जैन,मोहित सोनी,सौरभ जैन,ऋषि कमलेश विश्वकर्मा, शुभम पांचाल सहित सभी पदाधिकारी शामिल हुए ।

राजा दक्ष प्रजापति जी के जन्मोत्सव पर निकाले गये प्रजापति समाज के प्रमुख कमलेश सांवरिया,अर्जुन प्रजापति,राकेश प्रजापति, शिव प्रजापति,लोकेश प्रजापति,रितिक प्रजापति, राकेश प्रजापति,सुरेश प्रजापति सहित समाज के सभी वरिष्ठ जनों का विधायक इंजीनियर ने स्वागत सम्मान कर सभी को बधाई शुभकामनाएं दी ।

इस अवसर पर प्रजापति समाज के प्रमुख कमलेश सांवरिया द्वारा विधायक इंजीनियर जी का व सभी शामिल भाजपा के सदस्यो का स्वागत किया ।

“अक्षय सलोनी बने जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष”

अखिल भारतीय जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप फेडरेशन से संबद्ध जैन सोशल ग्रुप, आष्टा के वर्ष 2026-27 के लिए अक्षय सलोनी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चयनित किया गया है।
जैन सोशल ग्रुप एक युवा कपल (युगल) ग्रुप है, जो समाज में सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा कार्यों के माध्यम से सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।

आष्टा इकाई पिछले 14 वर्षों से विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश कोठारी हैं।
इस अवसर पर निवर्तमान अध्यक्ष यश प्रिया श्रीश्रीमाल के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा गया कि उनके नेतृत्व में संस्था ने अनेक उल्लेखनीय गतिविधियों का सफल आयोजन किया।

उनके कार्यकाल को सफल बनाने में उनकी पूरी टीम दीपेश-वैशाली सिंगी, अमर-नेहा कोचर, अमित-पूर्णिमा रूनवाल, प्रवीण-जया वोहरा , प्रफुल्ल तमन्ना चोरडिय़ा तथा विशाल-अंजलि पारख का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष अक्षय सलोनी ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सभी साथियों के सहयोग से संस्था की सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा गतिविधियों को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाएंगे।

अक्षय सलोनी के अध्यक्ष बनने पर रीना-पवन सुराना, मनीष-सोनल चोरड़िया, कुलदीप-मोना कोचर, अभिषेक-दीपा सुराना, राहुल-महिमा सुराना, नरेंद्र-सीमा चतरमूथा, तरुण-सोनम चतरमूथा , अतुल अपेक्षा चतर मुथा सहित समाज के अनेक सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी

“राजा दक्ष प्रजापति जन्मोत्सव पर निकला भव्य चल समारोह, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत”

नगर में आज प्रजापति कुम्हार समाज द्वारा समाज के गौरव महाराज राजा दक्ष प्रजापति का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम, हर्षाेल्लास और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाजबंधुओं द्वारा एक विशाल एवं भव्य चल समारोह का आयोजन किया गया।


चल समारोह का शुभारंभ बायपास चौराहा से हुआ जो नगर के इंदौर नाका, अलीपुर चौराहा, रेस्ट हाउस होता हुआ मां पार्वती नदी के पवित्र तट पर पहुंचा। मार्ग में जगह-जगह नगरवासियों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर जुलूस का आत्मीय स्वागत किया गया। चल समारोह में समाज अध्यक्ष कमलेश सांवरिया, वरिष्ठजन, युवा साथी एवं माताएं-बहनें बड़ी संख्या में ढोल-नगाड़ों और धार्मिक भजनों की धुन पर झूमते हुए शामिल हुईं। मां पार्वती नदी तट पहुंचकर महाराज राजा दक्ष की महाआरती की गई,

जिसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा अपने साथियों के साथ आयोजन स्थल पहुंचे। उन्होंने आकर्षक रूप से सजाए गए रथ पर विराजमान राजा दक्ष प्रजापति जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया

तथा समाज के सभी वरिष्ठों व युवाओं को जन्मोत्सव की बधाई दी।नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने कहा कि प्रजापति समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। यह समाज न केवल अपनी कड़ी मेहनत और हुनर से सृजन का कार्य करता है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।

आज जिस अनुशासन, उत्साह और भव्यता के साथ समाज बंधुओं ने बायपास चौराहा से लेकर मां पार्वती तट तक यह विशाल चल समारोह निकाला है, वह समाज की एकजुटता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। इस अवसर पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष रूपेश राठौर, पार्षद रवि शर्मा, कमलेश जैन, जुगलकिशोर मालवीय, राकेश प्रजापति सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद थे।

“गुरूपूर्णिमा पखवाड़ा अन्तर्गत जिला स्तरीय सांदीपनि उत्सव का हुआ आयोजन उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम वाले प्राचार्यों का किया सम्मान गुरू पूर्णिमा पर निबंध और भाषण प्रतियोगिता में विजेता विद्यार्थियों को दिये पुरूस्कार”

नगर के सांदीपनि (सी.एम. राइज़) शासकीय उमावि आष्टा में गुरूपूर्णिमा पखवाड़े के अन्तर्गत जिला स्तरीय सांदीपनि उत्सव का भव्य आयोजन दिनांक 27 जुलाई को किया गया।

कार्यक्रम में आष्टा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष जीवनसिंह मण्डलोई, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रतिनिधि विशाल चौरसिया, नगर महामंत्री धनरूपमल जैन एवं मोहित सोनी, वरिष्ठ पत्रकार सुशील संचेती,

नगरपालिका द्वारा नवनियुक्त एल्डरमेन श्री तोषनारायण भूतिया, शिवनारायण प्रजापति, अवनीश पिपलोदिया, भाजपा नेता सौरभ जैन, महेन्द्र सिंह ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार राजीव गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी शीलू शर्मा,

विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी निलेश सक्सैना, बीआरसीसी अजबसिंह राजपूत, सांदीपनि उमावि आष्टा के प्राचार्य सितवत खान आदि उपस्थित हुए तथा मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्जवलन कर माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की गई।

विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं गुरु वंदना प्रस्तुत की गई। छात्र-छात्राओं द्वारा दी गई प्रस्तुति की अतिथियों ने बहुत प्रशंसा की, तत्पश्चात् जिला शिक्षा अधिकारी शीलू शर्मा द्वारा स्वागत भाषण दिया गया उन्होनें गुरूपूर्णिमा पखवाड़ा अंतर्गत किये गये आयोजनों की सराहना की और कहा कि प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाई।

अतिथियों द्वारा अपना उद्बोधन दिया गया तथा गुरू की महिमा का बखान किया गया। इसी तारतम्य में विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि भगवान को भी गुरू की आवश्यकता होती है,

भगवान श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। बड़े सौभाग्य की बात है कि आप सभी के स्कूल का नाम भी सांदीपनि है आप भी श्रीकृष्ण एवं सुदामा के जैसी मित्रता और गुरू शिष्य परम्परा को अपनाकर अपने जीवन को सफल बनाएँ।

सांदीपनि विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विज्ञान प्रदर्शनी में हाईड्रोलिक लिफ्ट, हाईड्रोलिक पार्किंग, ए.आई. कार, डेनियल सेल, स्मार्ट स्कूल, व्हीट स्टोन ब्रिज, ए.आई. रोबोट, ज्वालामुखी एवं ए.आई. मॉडल तैयार कर उनका प्रस्तुतिकरण किया गया विद्यार्थियों द्वारा बनाये गये मॉडल को विधायक अन्य अतिथियों एवं प्राचार्यों द्वारा सराहा गया। विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय में सांदीपनि आश्रम भी तैयार किया गया था जिसमें प्राचीन गुरू-शिष्य परम्परा को दर्शाया गया।

इस अवसर पर लोक शिक्षण संचालनालय म०प्र० के निर्देशानुसार गुरुपूर्णिमा पखवाड़े में आयोजित निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता में पॉचों विकासखण्ड सीहोर, आष्टा, इछावर, बुधनी, भैंरूंदा से आये हुए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले 30 विद्यार्थियों को पुरूस्कार वितरित किये गये।

कार्यक्रम में हाल ही में सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों मुकेश चित्तौड़ा, सीताराम वर्मा, श्रवण कुमार झा, हेमराज चौरसिया, शाकिर बैग का भी शाल श्रीफल द्वारा सम्मान किया गया। सांदीपनि उत्सव के अंतर्गत जिले में हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा 2026 में शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम लाने वाले प्राचार्यों को भी सम्मान पत्र एवं शील्ड देकर सम्मानित किया गया।

अंत में संस्था प्राचार्य सितवत खान ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय शासन के वरीयता प्राप्त विशेष विद्यालय है इन विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है और शासकीय स्कूलों की तरफ विद्यार्थियों की रूचि बड़ी है। कार्यक्रम का संचालन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से पधारे अंकुर शर्मा, माधव यादव द्वारा किया गया
अंत मे आभार सितवत खान ने व्यक्त किया ।

“इनरव्हील क्लब ने ड्राइंग प्रतियोगिता आयोजित कर बच्चों की प्रतिभा को दिया मंच”

इनरव्हील क्लब आष्टा द्वारा सेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर किए जा रहे प्रयासों की श्रृंखला में ‘प्रोजेक्ट ऑरेंज वर्ल्ड’ के अंतर्गत एकलव्य एकेडमी में बच्चों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा सभी बच्चों को खेल सामग्री वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इनरव्हील क्लब आष्टा की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सोनी ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ- साथ रचनात्मक गतिविधियाँ और खेलकूद भी उतने ही आवश्यक हैं। ड्राइंग जैसी गतिविधियाँ बच्चों की कल्पनाशक्ति, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को विकसित करती हैं, जबकि खेल सामग्री उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करती है।


उन्होंने कहा कि इनरव्हील क्लब का उद्देश्य केवल सेवा कार्य करना ही नहीं, बल्कि समाज के बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना, उनमें सकारात्मक सोच, संस्कार और आत्मविश्वास का विकास करना भी है। क्लब भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास से जुड़े ऐसे जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर आयोजित करता रहेगा।


विद्यालय के मनीष सोनी ने इनरव्हील क्लब के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर क्लब की अध्यक्ष सुनीता सोनी, उपाध्यक्ष दीपिका सोनी, एडिटर अर्चना सोनी सहित विद्यालय के मनीष सोनी,
हिमांशु शर्मा, अर्चना वर्मा, हर्षिता पिपलोदिया, सुमन सोनी एवं अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन बच्चों को शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

“समझने का प्रयास करें, गुरु के मार्गदर्शन में ही आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है : मुनि सागर महाराज
गुरु के मार्गदर्शन में आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है : मुनि अगर्भ सागर महाराज”

नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर चातुर्मास हेतु विराजमान समाधि सम्राट वात्सल्य रत्नाकर भूतबली सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि सागर महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि अनेक लोग यह कहते हैं कि उन्हें धर्म और आत्मकल्याण की बातें समझ में नहीं आतीं, जबकि वास्तविकता यह है कि वे समझने का प्रयास ही नहीं करते। उचित मार्गदर्शक के अभाव में जीवन की दिशा स्पष्ट नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि “देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होती।”


प्रवचन की जानकारी देते हुए समाज के नरेन्द्र गंगवाल ने बताया कि मुनि सागर महाराज ने आगे कहा कि
आत्मकल्याण का बोध किसी को प्रारंभ में, किसी को जीवन के मध्य में और किसी को अंत समय में होता है, इसलिए जब भी अवसर मिले, वीतरागता की ओर बढ़ने का पुरुषार्थ अवश्य करना चाहिए।उन्होंने कहा कि बिना गुरु के मार्गदर्शन के जीवन की आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण नहीं हो सकती। गुरु ही जीवन को सही दिशा देते हैं तथा ऊँच-नीच,जाति-पांति और भेदभाव से ऊपर उठकर समभाव का संदेश प्रदान करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में समता, त्याग और प्रेम के संस्कार विकसित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियोंवश परिवार में अलग-अलग चूल्हे भी हो जाएँ तो भी आपसी प्रेम, संवाद और आत्मीयता कभी समाप्त नहीं होना चाहिए।


आष्टा की धार्मिक चेतना की सराहना करते हुए मुनिश्री ने कहा कि यह नगर वास्तव में “आस्था नगरी” के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहाँ लगभग 500 जैन परिवार निवास करते हैं। जब दो मुनि संघ एक साथ चातुर्मास करने के लिए एकजुट होकर आए हैं, तब समाज को भी सभी मतभेद भुलाकर एकता और समरसता के साथ धर्मकार्य करना चाहिए। उन्होंने स्मरण कराया कि भगवान आदिनाथ ने भोगभूमि से कर्मभूमि का मार्ग दिखाया था और आचार्यश्री ने भी आष्टा को “आष्टा” नहीं, बल्कि “आस्था नगरी” की संज्ञा दी थी।


मुनिश्री ने बताया कि वर्तमान में अष्टान्हिका महापर्व चल रहा है, जिसमें नंदीश्वर पूजा, विधान एवं विविध धार्मिक आराधनाएँ संपन्न हो रही हैं। इन साधनाओं से पापों की निर्जरा होती है और आत्मा निर्मल बनती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यथासंभव पापों से बचना चाहिए तथा सबसे पहले अपने भीतर से द्वेष और आसक्ति का त्याग करना चाहिए। यदि राग रखना ही है तो वह वीतरागी महापुरुषों के प्रति हो, संसार के रागी व्यक्तियों के प्रति नहीं।अपने आशीर्वचनों के अंत में मुनि सागर महाराज ने आष्टा के धार्मिक वातावरण की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि यहाँ की धर्ममय चेतना अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने आष्टा के किला क्षेत्र को सामान्य स्थान न बताते हुए कहा कि यह स्थान सम्मेद शिखरजी के समान आध्यात्मिक आस्था और साधना का पवित्र केंद्र प्रतीत होता है।

समभाव, त्याग, प्रेम और वीतरागता को जीवन में अपनाने का दिया संदेश, चातुर्मास में धर्म आराधना के लिए प्रेरित किया। धर्मसभा में नगर गौरव मुनि अगर्भ सागर महाराज ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों में आत्मकल्याण, गुरु मार्गदर्शन,वीतरागता, समभाव तथा धर्म साधना का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को संयम और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।मुनि अगर्भ सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य दिनभर की व्यस्तता के बाद सोते समय भी अगले दिन की योजनाओं और संसार की चिंताओं में उलझा रहता है।

उसका ध्यान आत्मा की ओर कम और संसार की ओर अधिक रहता है, इसलिए उसे आत्मकल्याण का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति एक-एक सीढ़ी चढ़कर ही प्राप्त होती है, इसलिए धीरे-धीरे नियमों और व्रतों को अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए।उन्होंने बताया कि आष्टा में वर्तमान में 85 व्रती हैं,जो अत्यंत प्रसन्नता का विषय है।

अपने जीवन का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने उन्हें प्रारंभ में दो प्रतिमाएँ ग्रहण कराई थीं और आज वे इस मुकाम तक पहुँच सके हैं। यह सब पुण्योदय और गुरु कृपा का परिणाम है। गुरुदेव जो भी नियम देते थे, वे बिना एक क्षण का विचार किए उन्हें स्वीकार कर लेते थे। उन्होंने कहा कि व्रत लेकर रुकना नहीं चाहिए,बल्कि क्रमशः आगे बढ़ते रहना चाहिए।मुनिश्री ने बताया कि आष्टा प्रवास के दौरान मुनि भूतबली सागर महाराज ने उनसे पूछा था कि उन्होंने कितनी प्रतिमाएँ ग्रहण की हैं। जब उन्होंने दो प्रतिमाओं का उल्लेख किया तो मुनिश्री ने प्रेरणा दी कि प्रत्येक वर्ष कम से कम एक प्रतिमा बढ़ाते रहें। इसी प्रेरणा से उन्होंने दो वर्षों में दस प्रतिमाएँ पूर्ण कीं। उन्होंने सभी से आत्मकल्याण के लिए निरंतर साधना करने का आह्वान किया।

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