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आष्टा । गत दिवस कलेक्टर बालागुरु के.की अध्यक्षता में टीएल बैठक सम्पन्न हुई थी । उक्त बैठक में कलेक्टर सीहोर ने नए शिक्षा सत्र को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को राहत देने के लिए स्कूलों एवं दुकानदारों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए ।

कलेक्टर सीहोर ने शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित प्रकाशकों और तय दरों पर ही पाठ्य पुस्तकों की बिक्री सुनिश्चित की जाए । ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े,ओर वे प्राइवेट विद्यालयों की मनमानी से मनचाही पुस्तको के चलाने, उक्त पुस्तके किसी एक ही दुकान पर मिलने के कारण उक्त दुकानदार की लूट से बच सके कि चिंता की गई ।

टीएल बैठक में कलेक्टर ने यह भी कहा कि किसी भी स्कूल द्वारा अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। यदि इस प्रकार की शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि समय-समय पर दल बनाकर स्कूलों और दुकानों की जांच भी की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किताबों की बिक्री नियमों के अनुसार ही हो रही है या नही । वही सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिली है

उसके अनुसार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कई पुस्तक बिक्रेताओं ने सब कुछ सेटिंग जमा लिया है,वही कलेक्टर के आदेशों की कैसे धज्जियां उड़ाई जाय उसकी भी योजना बना ली गई है । कई विद्यालयों ने ओर पुस्तक बिक्रेताओं ने “सांप भी निकल जाये और लाठी भी ना टूटे” के तहत पूरी प्लांनिग को मूर्तरूप दे दिया है । इसमें वे लोग पर्दे के पीछे है,जिन्हें कलेक्टर के आदेशों का पालन कराना है.? स्मरण रहे उक्त विषयो को लेकर प्रशासन बड़ी बड़ी बाते करता है लेकिन फिर भी बेचारा पालक लुटता है ।

इस बार देखना है कि क्या कलेक्टर के आदेशों का पालन होगा,कराया जायेगा, नही मानने वालों पर क्या जिम्मेदार कार्यवाही करेंगे या ये सब कुछ एक कागजी लिखापढ़ी के साथ मात्र रस्म अदायगी की तरह साबित होगा.? वैसे पुस्तक माफिया,शिक्षा माफिया सब सक्रिय हो कर हर स्तर पर योजना बनाने में जुटे हुए है की कैसे गली निकाल कर लूट के खिलाफ कार्यवाही से बचे भी ओर लुटे भी सही..?

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