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सीहोर । आज जिला जनसम्पर्क कार्यालय से एक प्रेस नोट सीएमएचओ की ओर से रिलीज किया गया । जिसमे कहा गया कि निजी फीजियोथेरेपी केन्द्रो को अपना पंजीयन कराना अब अनिवार्य हो गया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार अब निजी नर्सिंग होम एवं क्लिनिकल स्टेब्लिश्मेंट का विनिमय म.प्र. उपचार्यगृह तथा रजोपचार्य संबंधी स्थापनाये (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 तथा नियम 1997 (यथा संशोधित) 2021 के स्थापित प्रावधान अनुसार समस्त फीजियोथेरेपिस्ट को अधिनियम की धारा 2 में क्लिनिकल स्टेब्लिश्मेंट को परिभाषित किया गया हैं।

अधिनियम की धारा 3 के अनुक्रम में कोई भी व्यक्ति द्वारा क्लिनिकल स्टेबलिसमेंट का संचालन (निजी फीजियोथेरेपी केन्द्र) बिना विनियामक अधिनियम के अन्तगर्त पंजीयन के बिना नहीं किया जा सकता। जिले के समस्त निजी फीजियोथेरेपी केन्द्रो को निर्देशित किया गया है कि फीजियोथेरेपी केन्द्रो का पंजीयन अनिवार्य रूप से कराये। उपचार्यगृह तथा रजोउपचार्य संबंधी स्थापनायें (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 तथा नियम 1997 (यथा संशोधित) 2021 के प्रावधान अनुसार सुनिश्चित किया जाये ।

अब ये प्रश्न खड़ा होता है की जब निजी फिजियोथेरेपी केंद्रों का पंजीयन अनिवार्य किया गया है तो शासन और प्रशासन को,स्वास्थ विभाग को उन डॉक्टरों के क्लीनिकों का भी पंजीयन अनिवार्य क्यो नही होना चाहिये जो सीहोर आष्टा सहित पूरे जिले में इंदौर,भोपाल,उज्जैन सहित कई बड़े शहरों,बड़े अस्पतालों से आ कर किसी ना किसी मेडिकल दुकान वाले के आशीर्वाद से,उसके संरक्षण में,उसकी कृपा दृष्टि से वो सप्ताह में एक दिन या दो दिन आता है,अस्थाई क्लिनिक जो उसे कृपा दृष्टि वालो की मेहरबानी से उपलब्ध कराया जाता है वहां आ कर बैठता है,मरीजों को देखते है,बीमारी का एक सप्ताह का या 15 दिन का डोज लिखते है,वो डोज पूरे शहर में कही भी किसी भी अन्य मेडिकल दुकान पर नही केवल कृपा दृष्टि रखने वाली दुकान पर ही मिलता है,मजबूरी में बीमार पीड़ित लेता है,डॉक्टर भी मनमानी फीस लेता है,शाम को फीस की राशि के साथ दवा का मोटा कमीशन ले कर रवाना हो जाता है । अब प्रश्न ये है कि जब निजी फिजियोथेरेपी केंद्रों का पंजीयन सरकार ने अनिवार्य किया है तो इन प्राइवेट डॉक्टरों का पंजीयन सीएमएचओ कार्यालय में क्यो नही होता है.?

क्या इनका पंजीयन हो का पहले से ही नियम है,अगर है तो आज तक बहार से आने वाले डॉक्टरों का पंजीयन सीहोर कार्यालय में क्यो नही हुआ । और अगर अभी तक ऐसा नही हुआ तो क्या सरकार को,उसके स्वास्थ विभाग को इस ओर ध्यान नही देना चाहिये.? सीहोर आष्टा सहित पूरे जिले में सैकड़ो डॉक्टर बहार से आते है,अपनी दुकान चलाते है,जेब भर कर शाम को रवाना हो जाते है । जो डॉक्टर बहार से आते है क्या जिला स्वास्थ विभाग ने उनकी डिग्री चैक की की वे डिग्री धारी है या ..? इस मामले में सीएमएचओ सीहोर को स्पष्ट करना चाहिये कि बहार से आने वाले डॉक्टरों का पंजीयन अनिवार्य है या नही.?

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