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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा प्रदेश की बहनों को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान घोर निंदनीय है। जीतू पटवारी ने जो कहा वो मध्यप्रदेश की समस्त बहनों का घोर अपमान है,उनका बयान कांग्रेस की महिला विरोधी और महिलाओं को दूषित दृष्टि से देखने वाली चरित्र को पुनः प्रमाणित करता है। जिस दिन प्रदेश की लाडली बहनाए सात्विक श्रद्धा से हरितालिका तीज का व्रत रख रही थी,ऐसे पावन अवसर पर उन बहनों को शराबी कहकर संबोधित किया जो न केवल बहनों का, बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति और आस्था का भी घोर अपमान है ।

उक्त उदगार, जीतू पटवारी द्वारा प्रदेश की लाडली बहनाओ को शराबी कहे जाने पर आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भाजपा महिला मोर्चे द्वारा कालोनी चोराहे पर जीतू पटवारी का पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहे । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कहा कि जीतू पटवारी का बयान महिला विरोधी बयान के साथ अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस की संस्कृति हमेशा महिलाओं का अपमान करने की रही है।

मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए बहना लाडली होती हैं,वहीं कांग्रेस के लिए शराबी बहना होती है। जब कांग्रेस की सरकार आई थी उस दौरान प्रदेश की बहनों के साथ कांग्रेस ने छलावा किया था। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव महिलाओं को सम्मान देकर मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहे है, वहीं कांग्रेस पार्टी और जीतू पटवारी उनका अपमान कर रहे है।
पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा महिला मोर्चे की जिला अध्यक्ष ऋतु आनन्द जैन ने कहा की
मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कांफ्रेंस में मप्र की लाडली बहनाओ को शराबी कहना बहुत ही शर्मनाक है। हरतालिका तीज के दिन हमारी बहनें निर्जला उपवास करती हैं, ऐसे समय में इस तरह का बयान देना प्रदेश की बहनों का अपमान है। भाजपा महिलाओं का सम्मान करती है और उनके सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं कांग्रेस उनका लगातार अपमान कर रही है। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यक्रम कन्यापूजन से शुरू होते रहे हैं।

जबकि कांग्रेस में महिलाओं को कभी तंदूर में जलाया जाता है, तो कभी आत्महत्या करने पर विवश कर दिया जाता है। जीतू पटवारी ने जो कहा उससे कांग्रेस का एक बार फिर चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हुआ है। कांग्रेस की संस्कृति हमेशा से महिलाओं का अपमान करने की रही है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी स्वयं महिला हैं,क्या वे जीतू पटवारी के बयान से सहमत हैं। उनको स्पष्ट करना चाहिये। दिये गये बयान को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी जब तक महिलाओं से माफी नहीं मांगेंगे, उन्हें प्रदेश की बहनें कभी माफ नहीं करेंगी। मध्यप्रदेश की बहने अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगी और आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को सबक सिखाने के लिए तैयार रहेगी। भाजपा महिला मोर्चे ने जीतू पटवारी से अपने दिए हुए बयान के लिए तत्काल मांफी मांगने की मांग की है।
विधायक गोपालसिंह इंजीनियर के नेतृत्व में महिला मोर्चे ने जीतू पटवारी के पुतले की पहले चप्पलों से पिटाई की उसके बाद पुतले का दहन किया गया ।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पुतला दहन कार्यक्रम में ऋतु आनन्द जैन,नपा अध्यक्ष हेमकुंवर रायसिंह मेवाडा,तारा कटारिया,लता मुकाती,गिरजा कुशवाह, विशाल चौरसिया,धनरूपमल जैन, मोहित सोनी, रवि शर्मा, अर्जुन कर्मनखेड़ी,मनोज ताम्रकार,मनीष धारवा,माखन कुशवाहा, मानकुंवर मेवाड़ा,भगवत मेवाड़ा,तेजपाल मुकाती,आनन्द जैन,जयसिंह ठाकुर,वीरेन्द्र ठाकुर,तेजसिंह कप्तान, बबली कुशवाह,रूपाली चौरसिया,अनीता ठाकरे,निर्मला कुशवाहा,संध्या देवांग,मधु पाठक नेहा राजपूत सहित बड़ी संख्या में
भाजपा महिला मोर्चे की बहने, भाजपा नगर मंडल के पदाधिकारी,कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्तिथ थे ।

“क्रोध रूपी अग्नि को बुझाकर क्षमा रूपी धर्म को धारण कर सकते हैं — मुनिश्री प्रवर सागर मुनिराज”

दसलक्षण महापर्व के अंतर्गत श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर अरिहंत पुरम अलीपुर में उत्तम क्षमा धर्म पर मुनि श्री प्रवर सागर जी मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन्होंने अपने कर्म रूपी पुरुषार्थ से क्रोध रूपी अग्नि को बुझा दिया है वह जीव अनंत शीतलता और अनंत क्षमा का अनुभव करते हुए अनंत सुख की प्राप्ति करते हैं। जिनके क्रोध की अग्नि निरंतर जल रही है,सत्ता में क्रोध पढ़ा हुआ है,वे जीव निरंतर ही इंद्रिय सुख का अनुभव करते हैं। लेकिन आचार्यों ने कहा कि जो क्रोध की अग्नि से सम्पन्न है वह जीव पुरुषार्थ करके उस क्रोध रूपी अग्नि को बुझाकर क्षमा रूपी धर्म को धारण कर सकते हैं। मुनिश्री ने कहा आज चिंतन करने का दिन है पिछले वर्ष भी हमने महापर्व के प्रथम दिन क्षमा धर्म को समझा था और इस वर्ष भी हम क्षमा धर्म को समझ रहे हैं ,लेकिन क्या हमने वास्तव में क्षमा धर्म को अपने जीवन में उतारा अथवा नहीं ,यदि हमने वास्तविकता में क्षमा धर्म को हृदय में धारण किया है तो यह धर्म करना हमारा सार्थक होगा। हमने अपने जीवन में अनादि से लेकर अभी तक कितना क्रोध किया, कितने लोगों से शत्रुता की अर्थात उस भाव को अपनी आत्मा में उत्पन्न कर लिया। आज तो हम सभी को शीशे में जाकर चेहरे को देखना है कि चेहरा हमारा क्षमा का है या शत्रुता का। आचार्यों ने कहा कि उस वर्ष और इस वर्ष भी क्षमा धर्म की पूजन और क्षमा धर्म की माला जपी,आज तो परिवर्तन का दिन है, भावों के परिवर्तन का दिन है ।यदि किसी व्यक्ति के प्रति हमारी कषाय 6 माह से अधिक जा रही है तो हम अपने जीवन में क्षमा धर्म को धारण नहीं कर सकते।मात्र मनुष्य पर्याय में ही मोक्ष की प्राप्ति ।मुनि श्री प्रवर सागर जी ने कहा कि जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से कर्मचक्र व्यूह को तोड़ दिया है,उस कर्म के चक्कर से अलग हो गए हैं। जिन्होंने मोहनीय कर्म को परास्त कर दिया है वे जीव अनंत सुख का अनुभव करते हैं,जो जीव निरंतर कर्म चक्र व्यूह में फंसकर जन्म और मरण को प्राप्त हो रहे हैं ,जो छद्मस्थ हैं वे जीव इंद्रिय सुख का अनुभव करते हैं। मात्र कर्मभूमि का मनुष्य ही मोक्ष सुख को प्राप्त कर सकता है, दिगम्बर मुद्रा को सिर्फ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ही धारण कर सकते हैं। आने वाले दसलक्षण महापर्व के उत्सव का उत्साह है अथवा नहीं, यदि उत्साह मरा हुआ है तो धर्म-ध्यान नहीं हो सकता और यदि उत्साह जीवित है तो धर्म-ध्यान हो सकता है। स्वर्ग में रहने वाले देव भी उत्साह से भरे हुए हैं कि मैं कब नंदीश्वर जाऊं, कब तीर्थ वंदना करूं, अष्टांंहनिका महापर्व में देव तीर्थ वंदना करके पुण्य का संचय करते हैं। आचार्यों ने कहा कि बिना सम्यकदर्शन के स्वर्ग की प्राप्ति भी हो रही तो वह निरर्थक है, आचार्यों ने मार्ग दिखाए कि कोई व्यक्ति यदि धूप में चल रहा है। दुख का अनुभव और जो व्यक्ति छाया में बैठा हुआ है ,वह सुख का अनुभव करता है।

अतः जो जीव व्रतों को धारण करते वह कभी नरक और तिर्यंच गति में नहीं जाते । किसी ने ऐसा कहा कि जितना पाप स्त्री का भोग करने में नहीं जितना पाप मिथ्यात्व की शरण में जाने से है।आचार्य समंतभद्र स्वामी ने कहा कि समीचीन धर्म से ही सच्चे सुख की प्राप्ति होती है। आचार्यों ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति जौं के दाने के बराबर जिनालय का निर्माण और राई के दाने के बराबर जिनबिंब को विराजमान करता है वह जिन संज्ञा को प्राप्त कर लेता है। आचार्य विशुद्ध सागर जी मुनिराज जिनके दीक्षा काल की 40 से 45 वर्ष में कभी कहीं भी एक ईट भी नहीं लगवाई यह उनका नियम है और श्रमण मुनि श्री प्रवर सागर जी का भी नियम है जिनके भी दीक्षा काल को 12 से 13 वर्ष हो गए हैं उनने भी कहीं भी कोई ईट नहीं लगवाई और ना ही कुछ तोड़फोड़ करवाई क्योंकि यदि अहिंसा धर्म का पालन करना है तो जिस कार्य में हिंसा हो रही हो वह कार्य छोड़ देना चाहिए। आचार्य विशुद्ध सागर जी एक ऐसे मुनिराज हैं जिनका नियम है उनके प्रवचन मुनि श्री ने भोपाल लालघाटी में पंचकल्याणक के शुभ अवसर पर सुने कि जब ईट का भट्टा तैयार होता है उसमें असंख्यात गुणी जीवों की हिंसा होती है ,अतः मुनि श्री प्रवर सागर जी ने भी आचार्य विशुद्ध सागर जी का प्रवचन सुनकर नियम लिया था कि मैं जब दीक्षा लूंगा तब ना तो एक ईट लगवाएंगे ना ही एक ईट तुड़वाएगे।

“पक्की सड़क कि उम्मीद लेकर आष्टा विधायक से जन सुनवाई में लगाई गुहार कच्चे रास्ते से लोगों का आवागमन मुश्किल”

आष्टा ब्लॉक की ग्राम पंचायत उदयपुरा से रामपुरा कला का आम रास्ता अत्यंत खस्ताहाल स्थिति में है । ये लगभग 4 की.मी.लंबा रास्ता है । बरसात के मौसम में यह कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है । इससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।

आज ग्रामीणों ने विधायक गोपालसिंह इंजीनियर के कार्यालय में जाकर उदयपुर से रामपुरा कला और उदयपुर से बापचा की सड़क का निर्माण कराने हेतु आवेदन दिया और मांग की जल्दी से जल्दी सड़क बनाई जाए ताकि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी नहीं हो । किसानों को अपने कृषि कार्य के लिए साल भर परेशान होना पड़ता है ग्रामीण जनों का कहना है अगर पक्की सड़क बनती है तो इससे दोनों गांव कि दूरी में लगभग 15 किमी का अन्तर आयेगा ।

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