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आष्टा । पूरे मप्र में ही नही देश मे जिस आष्टा के पांच दिवसीय रंग पर्व खास कर आष्टा की ऐतिहासिक रंगपंचमी की चर्चा होती है,उस आष्टा का रंग पर्व धीरे धीरे अपनी वो पहचान खोता जा रहा है,जिसके लिये वो पहचाना जाता है।

इस वर्ष 6 दिवसीय रंग पर्व के अंतर्गत 29 मार्च को जिस महादेव की होली ने हजारों की उपस्तिथि से इतिहास रचा हो,जो पूरे देश मे चर्चा का विषय बनी हो उस ही आष्टा में उसके दूसरे दिन मनाई गई रंगपंचमी में मात्र सो-दोसो लोगो की उपस्तिथि चर्चा के साथ चिंता और विचारणीय प्रश्न सबके सामने खड़ा है।

रंग पंचमी पर सुबाह से ही युवकों का रंग खेलने का सिलसिला शुरू हो गया था। मोहल्लों में हर चौराहे पर रंग खेलने वालों की मोहल्ले के मान से भीड़ भाड़ नजर आई।

नपा ने रंग खेलने के लिये ड्रम रखाये,कुछ स्थानों पर टैंकर भी रखे गये। हिन्दू उत्सव समिति के अध्यक्ष कालू भट्ट सोशल मीडिया के माध्यम से रंगपंचमी को लेकर की गई व्यवस्थाओ की जानकारी देने के साथ ही नागरिको से रंग खेलने घरों से बाहर निकल कर रंग खेलने आने की अपील करते भी सुने गये।

फिर भी लोग कम आये। वैसे मोहल्लों मोहल्लों में जरूर आज रंगपंचमी पर रंग खेलने वालों में उत्साह देखा गया। काले तालाब को इस बार पानी सप्लाय के लिये चुना गया।

नदी के पानी को बचाया गया। क्योकि तालाब के सौंदर्यीकरण के लिये उसके पानी को खाली किया जाना है,इसलिए होली में उसका उपयोग किया गया। दोपहर बाद नपा ने रंग खेलने के लिये टैंकरों से सभी मोहल्लों में रखे गये ड्रमों टैंकरों में पानी भरने का कार्य शुरू किया।

आचार संहिता के कारण इस बार सभी व्यवस्थाओ पर प्रशासनिक अधिकारियों की निगाह रही।
नपा अध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाडा,हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष कालू भट्ट पूरे समय नगर में घूम कर रंग,पानी की व्यवस्थाओ को देख रहे थे।

दोपहर बाद रंगपंचमी का जुलूस परदेशीपुरा अस्पताल चौराहे से शुरू हुआ। जुलूस में शामिल हुलियारो ने परदेशीपुरा, खत्री मार्केट, बुधवारा,गल चौराहा,गंज,बड़ा बाजार,भवानी चौक पहुच कर रंगपंचमी का रंग खेला।

पूरे जुलूस में इस बार हुलियारो की संख्या काफी कम रही यही विचारणीय प्रश्न है की हमारे आष्टा की रंगपंचमी अपना वो स्वरूप क्यो खोती जा रही है जिसके कारण वो जानी पहचानी जाती है।

इसको लेकर कल से आज तक कई लोगो से चर्चा हुई सभी ने इसको लेकर अलग अलग कारण बताये कारण कुछ भी हो हिन्दू उत्सव समिति सकल समाज सहित सभी हिंदू संगठनों को सामूहिक रूप से विचार विमर्श कर रंगपर्व रंगपंचमी जो स्वरूप घटता जा रहा है वो घटे नही इस पर गहन चिंतन मनन करना चाहिये।

रंगपंचमी फीकी क्यो रही इसको लेकर चर्चा के दौरान जो बातें सामने आई उसके अनुसार पांच दिनों तक रंगपर्व मनाने के कारण बड़ी संख्या में नागरिको का बहार घूमने,तीर्थ यात्रा पर जाना,नागरिक अब पांच दिनों की जगाह केवल दो दिनों का रंग हो,का मत आया।

महादेव की होली के दूसरे ही दिन रंगपंचमी का होने के कारण थक चुकने के कारण लोग कम रंग पंचमी खेलने आये। 5 दिवसीय रंग पर्व मनाने में अब लोगो की रुचि कम दो या तीन दिन का ही रंग पर्व मनाया जाये के प्रति लोगो का मत सामने आना।

पूर्व के वर्षो में भी यह मत उभरा था। लेकिन उस पर कोई एक राय कभी नही हुई। खेर कारण कुछ भी हो। त्योहार परम्परा अनुसार ही हो यह सभी चाहते है । उसमे सुधार संशोधन हो ये समाज का विषय है,उसे ही तय करना है,निर्णय करना है।

बस चिंता का कारण यही है की त्योहार का स्वरूप पहले की अपेक्षा घटना यह विचारणीय है। वैसे महादेव की होली ने तीन वर्षों से नगर में एक नया माहौल जरूर बनाया है।

सीहोर जिले का नाम पूरे देश मे फैलाने वाले हमारे सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय कथा वाचक पं श्री प्रदीप मिश्रा जी ने जिले में नवाब की होली के स्थान पर महादेव की होली की जो शुरुआत की वो तीन वर्ष में चरम पर पहुची है। और ये इसी तरह बरकरार रहना चाहिये।

महादेव की होली से जिले में एक नई धार्मिक चेतना,आस्था,श्रध्दा,भक्ति का श्रीगणेश हुआ है । रंगपर्व के दौरान प्रशासन पुलिस जो 6 दिनों से कानून एवं व्यवस्था में लगा था। आज पुलिस होली थानों में मनाई जायेगी।

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