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आष्टा । श्री ब्रह्मानंद जन सेवा संग द्वारा आयोजित,माँ कृष्णा धाम आश्रम पर चल रहे श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव पर आज द्वितीय दिवस पर सैकड़ो भक्तों ने मां कृष्णा जी के सत्संग का लाभ लिया । आज के सत्संग में मां ने अपनी ओजस्वी वाणी में कहा की-जिस तरह हमारे द्वारा बैंक में की गई फिक्स डिपाजिट राशि बढ़ती है, ठीक उसी तरह पाप और पुण्य दोनों ही बढ़ते रहते हैं । यदि हमने जीवन में कोई पाप किया है तो वह वर्षों बाद हजारों गुना बढ़ जाता है ।

इसलिए जल्दी ही अपने गुरु के समक्ष उसका प्रायश्चित कर लेना चाहिए। प्रायश्चित करने से से पाप नष्ट हो जाता है । ठीक उसी प्रकार यदि हमने कोई जीवन में सत्कर्म या पुण्य किया है तो उसे भूल जाएं ताकि वह वर्षों बाद हजारों गुना बढ़कर हमें अच्छा परिणाम देता है ।

एक बार द्रोपति ने नदी में स्नान कर रहे साधु को अपनी साड़ी का एक छोटा सा टुकड़ा दे दिया था, क्योंकि उनका गमछा नदी में बह गया था समय चलते वही कपड़े का टुकड़ा द्रोपति चीरहरण के समय साड़ी बनकर हजारों गुना लौटकर आया था

“भगवान से विमुख होकर नहीं सन्मुख होकर काम करें”

सत्संग में आगे मां ने बताया कि जब भी कोई कार्य करें हमेशा भगवान को साथ लेकर भगवान के सन्मुख होकर करें । महाभारत में पांडवों ने भगवान कृष्ण को साथ लेकर उनके सन्मुख होकर कार्य किया था, इसलिए उनके हर कार्य सफल हुए और उनकी जीत हुई । किंतु कौरवों ने भगवान के विमुख होकर कार्य किया इसलिए उनके प्रत्येक कार्य विफल रहे और अंत में उनकी हार हुई ।

“बुराई गाजर घास की तरह होती है,जो जल्दी फैलती है”

मां ने आगे बताया कि बुराई हमेशा गाजर घास की तरह होती है जो बहुत जल्दी फैलती है । बिना खाद पानी के ही बढ़ती रहती है । ठीक उसी प्रकार हमारे अंदर भी बुराई बहुत जल्दी पनप जाती है । किंतु अच्छाई आम और सेब के पेड़ की तरह होती है जिसे बड़ा करने में खाद पानी और बहुत अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है । एक बुराई हजारों अच्छाइयों का नाश कर देती है इसलिए जीवन में अच्छाइयों को ग्रहण करते रहें

“भगवान हमारे अंदर ही है और हम उसे बाहर ढूंढने में लगे हैं”

मां ने एक प्रसंग के माध्यम से बताया कि एक बूढ़ी मां की सुई गुम हो गई वह सुई को धूल में बाहर ढूंढ रही थी तभी वहां कुछ बच्चे पहुंचे और कहा कि माता जी आप क्या ढूंढ रही हो तो उस बूढ़ी मां ने कहा कि मेरी सुई गुम हो गई है ढूंढने में मदद करो।

बहुत प्रयास के बाद उन बच्चों को सुई नहीं मिली तब बच्चों ने पूछा कि आपकी सुई कहां गुम हो गई है । तब बूढ़ी मां ने कहा कि वह तो झोपड़ी में गुम हो गई है । फिर आप यहां क्यों ढूंढ रही हो बोली यहां उजाला था इसलिए ढूंढ रही हूं । ठीक उसी प्रकार हम भी उस परमात्मा को बाहर ढूंढ रहे हैं जबकि वह हमारे अंदर ही है ।

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