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आष्टा। संसार का नियम है जन्म लिया है तो मरण भी होगा।आष्टा में साधु- संतों का आना-जाना लगा रहता है,सानिध्य मिलता है। यहां पहले ही 3 साधु विराजित हैं, 19 साधु और मिल गए,सोने पर सुहागा हो गया। जैन साधु- संत पद बिहारी होते है।जब साधु -संतों का मिलन होता है तो बहुत ही अदभुत क्षण होता है,काफी प्रसन्नता होती है।

गुरु का वियोग इन रत्नाधारी के चेहरे पर नजर आ रहा है। माता- पिता एवं गुरु का वियोग होने पर बहुत कमी महसूस होती हैं,अपने से बड़ों की महिमा बहुत है।जब गुरु का आशीर्वाद बरसता है तो शिष्य का कायाकल्प हो जाता है। मुनि, आचार्य भगवंतों का सानिध्य प्राप्त होता रहेगा।

उक्त बातें नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर नगर प्रवेश के पश्चात आशीष वचन देते हुए आचार्य अजीत सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुण्य सागर महाराज एवं मुनिश्री भूतबलि सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि सागर महाराज ने कहीं।

मंगलवार को सुबह मुनि पुण्य सागर महाराज सहित 19 पिच्छी का संघ का नगर प्रवेश कालौनी चौराहा से हुआ। प्रवचन की जानकारी देते हुए समाज के नरेन्द्र गंगवाल ने बताया कि मुनि पुण्य सागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहा कि स्वप्न में भी हमने आष्टा भंवरा जाने का नहीं सोचा था, लेकिन संयोग बने।

हम अपने पिता तुल्य गुरुदेव अजीत सागर महाराज की जन्म भूमि भंवरा में है यह पता थी,हम वहां पर पहुंचे,वह जन्म स्थली स्वर्ग के समान है। जन्म स्थली को भूलना नहीं चाहिए। संयम का मार्ग गुरु ने प्रारंभ किया। चतुर्थ पटाधीश के रूप में अजीत सागर महाराज जाने जाते हैं।आष्टा में साधु- संतों का आना-जाना लगा रहता है। सानिध्य मिलता है।

सोने में सुहागा, 19 साधु और मिल गए। तीन संत पहले से है। जैन साधु- संत पद बिहारी है। आपने कहा जब साधु -संतों का मिलन होता है तो काफी प्रसन्नता होती है। गुरु का वियोग इन रत्नाधारी के चेहरे पर नजर आ रहा है। माता- पिता एवं गुरु का वियोग होने पर अनाथ जैसे हो जाते हैं,अपने से बड़ों की महिमा बहुत है।

जब गुरु का आशीर्वाद बरसता है तो शिष्य का कायाकल्प हो जाता है।संसार का नियम है जन्म लेना और मरण करना। दुनिया में अनेक कला है। गुरु हमारे पथ प्रदर्शक है।मरण को शुमरण बनाना है तो गुरु जरूरी है। अनेक साधुओं ने समाधि मरण किया है। अनगिनत बार मर चुके हैं,सुमरण, सम्यक दर्शन करने की आवश्यकता है।इस पावन स्थल पर मुनि भूतबलि सागर महाराज ने समाधि मरण करके अपना जीवन सुधार लिया।हम भी समाधि मरण करें।

गुरु के बिना मोक्ष मार्ग प्रशस्त नहीं। गुरु के बिना जीवन शून्य, अधूरा है। मुनि श्री ने कहा आष्टा में 40–50 वृति है।यह संतों के सानिध्य के कारण। संग्रहित पूंजी को चारों दानों में लगाएं।अपने जीवन के अंदर भाग्य को जगाएं। दिगंबर अवस्था प्राप्त करना है

तभी कल्याण होगा। गुरु भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती है। आचार्य शांति सागर महाराज के कारण आज संतों के दर्शन पूरे देश में मिल रहे हैं। मैं तो गुरु आपको छोटी सी नदी पार करा रहा हूं आप मुझे संसार समुद्र से पार करा देना।जीवन में देव,शास्त्र,गुरु का सानिध्य मिला है।उसे प्राप्त कर अपना जीवन सफल करें।


मुनि सागर महाराज ने कहा मुनियों, आचार्य भगवंतों का सानिध्य हमेशा मिलता रहेगा।आप सभी भाग्यशाली और पुण्य शाली भी है। आचार्य अजीत सागर महाराज के दर्शन नहीं हुए लेकिन उनके शिष्य पुण्य सागर महाराज के समीप बैठ कर ऐसा लग रहा है कि हम अजीत सागर महाराज के पास बैठे हैं। हमें रत्नात्रय अंगीकार करना होगा।बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी ने कहा कि आष्टा में आदिनाथ भगवान की प्रतिमा देखकर अभिभूत हुए।

बहुत ही चमत्कारी प्रतिमा है। आष्टा बहुत धर्म प्रिय नगरी है। हमारी भूमि से अजीत सागर महाराज जन्में, उनके दर्शन आप लोगों ने नहीं करें,लेकिन आज उनके शिष्य मंच पर है।38 वर्ष पहले पुण्य सागर महाराज जी को अजीत सागर महाराज ने दीक्षा दी।

एक गुरु ने रत्न दिया है। किसी के पास धन, परिवार का खजाना है हमारे गुरु अजीत सागर महाराज के पास ज्ञान का खजाना है।सौरभ मति माताजी को 37 वर्ष दीक्षा लिए हो गए। णमोकार महामंत्र के नौ रत्न आज मंच पर है। भंवरा के लोगों की इच्छा थी भंवरा में गुरु मंदिर बनें।

गुरुदेव ने आशिर्वाद दिया, वहां भव्य गुरु मंदिर बनेगा। गुरु भक्ति हमेशा करते रहे। भादों मास जैसे पर्यूषण महापर्व का नजारा किला मंदिर पर दिख रहा है। ढोल – ढमाके के साथ नगर प्रवेश, कदम कदम पर हुआ पग प्रक्षालन मुनिश्री पुण्य सागर महाराज का ससंघ नगर प्रवेश कालोनी चौराहा से हुआ।

समाज के बच्चों के बैंड एवं ढोल ढमाके के साथ गल चौराहा,बुधवारा, गुप्ता गली से बड़ा बाजार होते हुए किला मंदिर पर पहुंचे। कदम -कदम पर मुनिश्री पुण्य सागर महाराज का पग प्रक्षालन किया गया। किला मंदिर पर मुनि संघ के संघपति गुवहाटी निवासी सुधीर जैन, विकास जैन का समाजजनों ने शाल – श्रीफल भेंट कर स्वागत व सम्मान किया।

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