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आष्टा । आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के समता पूर्वक समाधि होने के पश्चात विश्व व्यापि आव्हान के अंतर्गत आज पूरे भारत वर्ष में विन्यानजलि सभा आयोजित की गई ।

उसी के अंतर्गत नगर के दिव्योदय जैन तीर्थ किला मंदिर में विराजित आचार्य श्री के ज्येष्ठ श्रेष्ठ शिष्य पूज्य मुनि श्री भूतबलि सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में विन्यानजलि सभा का आयोजन किया गया

जिसमे नगर के जन प्रतिनधि एवं गणमान्य नागरिकों ने अपने अपने संस्मरण एवं शब्दो के माध्यम से विन्यानजलि समर्पित की । उसी क्रम में नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनधि राय सिंह मेवाड़ा,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार,

डॉ मीना सिंगी,सोनू गुणवान,धारा सिंह पटेल,पारसमल सिंघी,
गजराज सिंह पटेल,कालू भट्ट,अनिल श्रीवास्तव,जी एल नागर,पवन सुराणा,रवि शर्मा पार्षद,अतुल शर्मा,

प्रदीप प्रगति ,पत्रकार सुशील संचेती,नरेंद्र गंगवाल,गणेश सोनी,मुकेश बड़जात्या,लोकेंद्र बनवट, धनरूपमल जैन,उमेश शर्मा,मनोहर भोजवानी,कमलेश जैन पार्षद,अनिल धनगर,विशाल चौरसिया,तारा कटारिया, शकुंतला छाजेड़ आदि लोगो ने विन्यानजलि समर्पित की,एवं आचार्य श्री का गुणगान किया।

विनयांजलि में मुनि श्री ने कहा…

पूज्य मुनि श्री मुनि सागर जी महाराज ने कहा कि आप सभी ने आज आचार्य श्री को विन्यनजली समर्पित की कोई ज्यादा बोला कोई कम बोला पर भाव सभी के एक ही है । यह कोई शोक सभा नही है यह मोहि का निधन नही था एक निर्मोही का मरण हुआ है

,आचार्य श्री एक निर्मोही सन्त थे सन्तो के एक महासंत का जाना यह सभी को अचंभित कर गया।
राम का गमन हुआ तब पूरी प्रजा को रोना पड़ा आचार्य श्री के जीवन का हम यदि गुणगान करने बैठ जाये तो लेखनी कम पड़ जाए कागज ही कम पड जाए ।

जिनका घर ही मंदिर का रुप ले लिया हो उनका चरित्र कैसा होगा,समूचे भारत मे भागवत कर्ताओ ने नेताओ ने आचार्य श्री को अपनी ओर से विन्यानजलि भेंट की है,सभी लोग बड़े पूण्य शाली है जो इस आचार्य श्री के युग मे जन्म लिया और ऐसी महान आत्मा का साक्षात दर्शन का लाभ लिया है।


भूतबली सागर जी महाराज ने कहा कि आप लोग बहुत भाग्यशाली है जो मनुष्य की काया को धारण कर संतो का सानिध्य में अपना जीवन का कल्याण कर रहे है आचार्य श्री क्या करते थे वह नही आचार्य श्री ने क्या कहा वह करें इसी में सार्थकता होगी।
सभा का संचालन सुरेंद्र जैन ने किया

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